आज ही के दिन यानी की 18 अप्रैल को महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का निधन हो गया था। पूरी दुनिया अल्बर्ट आइंस्टीन के दिमाग का लोहा मानती थी। लेकिन आइंस्टीन का बचपन उनकी बाद की छवि से मेल नहीं खाता था। उनको बहुत बुद्धिमान वैज्ञानिक माना जाता था। बताया जाता है कि आइंस्टीन का मस्तिष्क सामान्य इंसानों से हटकर था। तो आइए जानते हैं उनकी डेथ एनिवर्सरी के मौके पर अल्बर्ट आइंस्टीन के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में…
जन्म और परिवार
जर्मनी में एक यहूदी इंजीनियर के घर में 14 मार्च 1879 में अल्बर्ट आइंस्टीन का जन्म हुआ था। बताया जाता है कि जन्म के करीब 4 सालों तक उन्होंने एक भी शब्द नहीं कहा था। तब परिवार ने आइंस्टीन की खूब जांच कराई। सबने एक ही बात कही कि बच्चा बिल्कुल ठीक है। एक रात डिनर के समय गर्म सूप पीते हुए अल्बर्ट का मुंह जल गया। तब परिवार ने बच्चे के मुंह से एक पूरा वाक्य सुना- सूप कितना गर्म है।
इसे भी पढ़ें: Benjamin Franklin Death Anniversary: 10 साल में स्कूल छोड़ा, America के बने Founding Father, जानें Benjamin Franklin की कहानी
प्रसिद्ध समीकरण
आइंस्टीन ने सबसे प्रसिद्ध और शानदार समीकरण ‘ई ईक्वल्स एमसी स्क्वैयर’ दिया था। उन्होंने साल 1905 में इस समीकरण को दुनिया के सामने ऱखा। साथ ही यह भी समझाया कि तारों और परमाणु विस्फोट में किस तरह से ऊर्जा बाहर निकलती है। इस समीकरण के जरिए ही एटम बम बना था। लेकिन हर सिक्के के दो पहलु होते हैं। एटम बम से इंसानियत को तबाह भी किया जा सकता है और बिजली का उत्पादन भी हो सकता है। आइंस्टीन शांत स्वभाव के थे और उनको हिंसा नहीं पसंद थी। इस कारण उन्होंने जर्मनी युद्ध के दौरान शांति का प्रस्ताव रखा था। आइंस्टीन को जर्मनी कभी भी रास नहीं आया। इस कारण 1880 में उन्होंने म्यूनिख जाने का फैसला किया। ऐसे में उनका पूरा परिवार भी म्यूनिख शिफ्ट हो गया।
नोबेल पुरस्कार
वहीं 09 नवंबर 1922 को ‘सैद्धांतिक भौतिकी’ में आइंस्टीन को उनकी सेवाओं के लिए खासकर फोटोइलेक्ट्रिक इफेक्ट की खोज के लिए ‘फिजिक्स में 1921 का ‘नोबेल पुरस्कार’ दिया गया था। वहीं आइंस्टीन को उनके 70वें जन्मदिन पर उनके सम्मान में ‘सैद्धांतिक भौतिकी में एक पुरस्कार’ का वितरण शुरू किया गया था।
ठुकराया था राष्ट्रपति का पद
अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने वाले आइंस्टीन को इजरायल का राष्ट्रपति बनने का निमंत्रण मिला था। क्योंकि यहूदी चाहते थे कि अल्बर्ट आइंस्टीन इस जिम्मेदारी को संभालें। लेकिन उन्होंने यह कहकर राष्ट्रपति पद को ठुकरा दिया कि उनके अंदर राजनीति और देश संभालने का क्षमता नहीं है।
मृत्यु
वहीं 18 अप्रैल 1955 को अल्बर्ट आइंस्टीन का निधन हो गया था।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.