अगर आप जमीन-जायदाद में निवेश की सोच रहे हैं तो जल्द फैसला करना फायदेमंद हो सकता है। इंदौर, भोपाल, जयपुर, पटना, रांची और लुधियाना जैसे टियर-2,3 शहर बेहतर विकल्प हो सकते हैं। प्रॉपटेक कंपनी स्क्वेयर यार्ड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 2 से 4 साल में इन शहरों में प्लॉट के दाम 25% से लेकर 100% तक बढ़ सकते हैं। स्क्वेयर यार्ड्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में ₹12.2 लाख करोड़ के सरकारी पूंजी निवेश, नए इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और रोजगार विस्तार की वजह से छोटे शहरों की जमीन आगामी वर्षों में सबसे तेज रफ्तार से महंगी होगी। इंदौर, जयपुर, भुवनेश्वर, कटक, वाराणसी और पुरी जैसे शहर इस लहर की अगुआई करेंगे।
मुख्य शहर के बाहरी इलाकों में सबसे तेज बढ़ेंगे दाम 15-40% – मेट्रो कॉरिडोर के 1 किमी दायरे में 30-70% – नए एयरपोर्ट/ एक्सप्रेसवे के पास 80-100% – हाई-ग्रोथ पेरिफेरल प्लॉटेड एरिया 20-60% – इंडस्ट्रियल कॉरिडोर/ लॉजिस्टिक हब (स्रोत: स्क्वेयर यार्ड्स रिपोर्ट 2026) 2020-25 – टियर-2 और टियर 3 शहरों में 5 साल में दोगुना तक हो चुके दाम यह कोई नई शुरुआत नहीं है। 2020 से 2025 के बीच भी छोटे-मझोले शहरों में जमीन और मकान, दोनों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। हर शहर में प्लॉट की बढ़त फ्लैट से 10-25% अधिक रही है। इंदौर में इस दौरान फ्लैट 72% तक और प्लाट में 85-100% तक तेजी देखी गई। शहर फ्लैट महंगे प्लॉट के दाम बढ़े
इंदौर 72% 85-100%
जयपुर 65% 75-90%
भोपाल 49% 60-75%
नागपुर 47% 55-70%
चंडीगढ़ 44% 50-65%
रायपुर 40% 45-60%
लुधियाना 38% 45-60%
पटना 35% 40-55%
रांची 33% 40-55%
जबलपुर 28% 35-50%
उदयपुर 25% 35-50%
स्रोत: एनएचबी रेजिडेक्स एचपीआई, प्रॉपइक्विटी
50 लाख से 1 करोड़ रुपए के घरों की मांग सबसे ज्यादा निवेशक – लंबे समय के लिए प्लॉट सबसे बेहतर विकल्प। इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स के पास लिए गए प्लॉट अगले 5-10 वर्षों में मल्टी-बैगर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं। नौकरीपेशा वर्ग – 50 से 1 करोड़ रुपए के मकानों की मांग सबसे ज्यादा। पहली बार घर खरीदने वाले – ब्याज दरें घटने, आसान सुविधाएं मददगार। 200 इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स और ‘अर्बन चैलेंज फंड’ से रियल एस्टेट में क्रांति टियर-2,3 शहरों में 200 से ज्यादा पुराने इंडस्ट्रियल क्लस्टर की बहाली, सेमीकंडक्टर मिशन-2.0 और इलेक्ट्रॉनिक्स-केमिकल सेक्टर में विस्तार से बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होंगे, जो इन शहरों में घर-प्लॉट की मांग बढ़ाएंगे। सरकार का 1 लाख करोड़ का ‘अर्बन चैलेंज फंड’ इसे रफ्तार देगा। आखिर टियर-2 और 3 शहरों में उछाल क्यों? मेट्रो शहरों में सीमित और महंगी जमीन से विस्तार की सीमित संभावनाएं हैं। छोटे शहरों में कम कीमतों पर बड़े प्लॉट खरीदे जा सकते हैं। इन्फ्रा निवेश का सबसे ज्यादा लाभ उन्हीं इलाकों को, जहां अभी विकास कम है। 70% ब्लू-कॉलर और बड़ी संख्या में वाइट-कॉलर जॉब्स महानगरों से निकलकर छोटे शहरों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
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