केरल की नीलगिरी पहाड़ियों पर 12 साल में एक बार बैंगनी रंग का खूबसूरत फूल खिलता है, जिसे देखने के लिए लाखों लोग आते हैं। इस फूल को तोड़ने पर जुर्माना भी लगेगा और जेल भी हवा भी खानी पड़ेगी। तो चलिए बताते हैं इस दुर्लभ फूल की खासियत।
नीलकुरिंजी फूल क्यों है इतना दुर्लभ
नीलकुरिंजी (स्ट्रोबिलैन्थिस कुन्थियाना) एक ऐसी झाड़ी है, जिसमें हर 12 साल में एक बार फूल खिलता है। इसे फूल बनकर खिलने में 12 साल का लंबा समय लग जाता है और यही कारण है कि इसे दुनिया का दुर्लभ फूल माना जाता है। खास बात ये है कि फूल खिलने के बाद इसका पौधा खत्म हो जाता है और फिर नए बीज के पनपने के लिए और उसमें फूल आने के लिए 12 साल का इंतजार करना पड़ता है।
कुरिंजीमाला सैंक्चुअरी
बता दें, साल 2006 में केरल के जंगलों का 32 वर्ग किलोमीटर इलाका इस फूल के संरक्षण के लिए सुरक्षित रखा गया था। इसे कुरिंजीमाला सैंक्चुअरी का नाम दिया गया और यह सैंक्चुअरी कुरिंजी कैंपेन काउंसिल की कोशिशों का नतीजा है। वैली ऑफ फ्लॉवर के बाद ये भारत की दूसरी फ्लॉवर सैंक्चुअरी है। यहां नीलकुरिंजी की तमाम प्रजातियां संरक्षित की जाती हैं और देखने को मिलेंगी। इसकी करीब 350 फूलों वाली प्रजातियां भारत में ही हैं। केरल की नाडुक्कानी, गुडालूर, ऊसिमलाई और ओ-वैली जैसी जगहों पर आपको ये फूल देखने को मिलेगा।
फोटोग्राफी के लिए मशहूर
जब भी नीलकुरिंजी फूल खिलता है, लाखों की संख्या में पर्यटक और हजारों फोटोग्राफर इसकी सुंदरता को तस्वीर में कैद करने के लिए आते हैं। देश ही नहीं विदेश से भी लोग इसके दीदार के लिए भारत आते हैं। केरल के वन विभाग की टीम इन फूलों को सुरक्षित रखने के लिए जुटी रहती है। केरल के स्थानीय लोग इस फूल को प्यार और रोमांस का प्रतीक मानते हैं।
तोड़ने पर होगी जेल और जुर्माना
नीलकुरिंजी फूल बेहद दुर्लभ है और यही कारण है कि इसे तोड़ने या किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाने पर जेल और जुर्माना का सीधा प्रावधान है। वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2023 में नीलकुरिंजी को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची तृतीय में शामिल किया। इसका मतलब हुआ कि इस फूल को कानूनी सुरक्षा मिली है और चेतावनी दी गई है कि अगर फूल को तोड़ा या किसी भी तरह का नुकसान पहुंचाया गया तो आपको 25 हजार रुपये का जुर्माना देना पड़ेगा या फिर तीन साल तक की जेल हो सकती है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे नीलकुरिंजी के खिलने वाली जगहों पर जाने से बचें और इस फूल के महत्व का सम्मान करें। इस फूल से जुड़ी किसी भी घटना की सूचना गुडालुर वन प्रभाग की टीम को आप टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-425-4353 पर दे सकते हैं।
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