सुपरस्टार रजनीकांत ने रविवार को उन चर्चाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्हें तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री विजय से जलन है। चेन्नई के पोएस गार्डन स्थित अपने घर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए रजनीकांत ने साफ किया कि हाल ही में डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन के साथ उनकी मुलाकात सिर्फ एक दोस्ती के नाते हुई थी और उसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं था। उन्होंने अफवाहों का जवाब देते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन से मिलना, विजय के मुख्यमंत्री बनने के रास्ते में रुकावट डालना या पार्टियों को आपस में जोड़ना नहीं था।
रजनीकांत ने की विजय की तारीफ
टीवीके के संस्थापक और मुख्यमंत्री विजय के प्रति किसी भी तरह की कड़वाहट से इनकार करते हुए जेलर स्टार रजनीकांत ने कहा कि उनके और नए मुख्यमंत्री के बीच उम्र का 25 साल का बड़ा अंतर है। उन्होंने विजय की कम उम्र में मिली बड़ी सफलताओं की तारीफ की। रजनीकांत ने कहा कि विजय ने इतनी छोटी उम्र में जो हासिल किया है, वह सिनेमा और राजनीति के दिग्गज नेता एमजीआर और एनटीआर की उपलब्धियों से भी कहीं बढ़कर है। आपको बता दें कि एमजीआर और एनटीआर अपने समय में क्रमशः तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे।
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बचपन से विजय को आगे बढ़ते देखा
रजनीकांत ने पुरानी यादें साझा करते हुए कहा, “मैंने विजय को बचपन से देखा है। अगर वे मुख्यमंत्री बन गए हैं, तो मुझे उनसे जलन क्यों होगी? वे महज 52 साल की उम्र में इतने ऊंचे पद पर पहुंच गए हैं और उन्होंने एमजीआर और एनटीआर से भी ज्यादा हासिल कर लिया है। मुझे उनसे जरा भी ईर्ष्या नहीं है।”
इसके साथ ही रजनीकांत ने विजय को उनकी ऐतिहासिक जीत पर बधाई भी दी। हाल ही में 23 अप्रैल को हुए चुनावों में विजय की पार्टी टीवीके ने कांग्रेस, वीसीके, वामपंथी दलों और आईयूएमएल के साथ मिलकर 108 सीटें जीतीं और सालों से राज कर रहीं डीएमके और एआईएडीएमके जैसी बड़ी पार्टियों को हराकर सरकार बनाई है।
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प्रशंसकों को सलाह
सुपरस्टार रजनीकांत ने बातचीत के आखिर में यह भी साफ किया कि उन्होंने सिर्फ अपने खराब स्वास्थ्य के कारणों की वजह से राजनीति में कदम नहीं रखा। उन्होंने अपने प्रशंसकों को खुलकर सलाह दी कि वे अपनी मर्जी से किसी भी राजनीतिक दल का समर्थन करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। इसके साथ ही उन्होंने तमिलनाडु की जनता से अपील की कि वे नए मुख्यमंत्री विजय को सरकार चलाने और खुद को साबित करने के लिए कम से कम दो साल का समय जरूर दें।
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