भारतीय क्रिकेट टीम के चयन को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार चर्चा का केंद्र विकेटकीपर बल्लेबाज संजू सैमसन हैं, जिन्हें आगामी जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारतीय टी20 टीम में जगह नहीं मिली है। इस फैसले पर भारत के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि कुछ खराब पारियों के आधार पर किसी खिलाड़ी को टीम से बाहर करना उचित नहीं है और इससे खिलाड़ियों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, रविचंद्रन अश्विन ने अपने डिजिटल कार्यक्रम “ऐश की बात” में चयनकर्ताओं के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वह इस निर्णय से बिल्कुल सहमत नहीं हैं। अश्विन ने कहा कि उनके लिए इस फैसले को स्वीकार करना मुश्किल है और उन्हें यह पूरी तरह अनुचित लगता है।
बता दें कि संजू सैमसन हाल ही में खेले गए टी20 विश्व कप में शानदार प्रदर्शन के कारण टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुने गए थे। हालांकि इसके बाद आयरलैंड के खिलाफ श्रृंखला और इंग्लैंड के खिलाफ पहले टी20 मुकाबले में उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। उन्होंने लगातार 5, 0 और 1 रन की पारियां खेलीं। इसके बाद उन्हें अंतिम एकादश से बाहर कर दिया गया और उनकी जगह 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को मौका दिया गया। बाद में जिम्बाब्वे दौरे के लिए घोषित टीम में भी संजू सैमसन को शामिल नहीं किया गया।
अश्विन ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि दो या तीन खराब पारियों के बाद किसी खिलाड़ी को बाहर कर दिया जाएगा, तो आगे हर हार के बाद किसी न किसी खिलाड़ी पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि यदि टीम अगला मुकाबला भी हार जाती है, तो फिर किस खिलाड़ी को बाहर किया जाएगा। उनके अनुसार ऐसी सोच किसी भी मजबूत टीम के लिए सही नहीं मानी जा सकती है।
गौरतलब है कि अश्विन इससे पहले भी सूर्यकुमार यादव से जुड़े एक चयन विवाद पर अपनी राय रख चुके हैं। उन्होंने कहा कि यदि खिलाड़ियों को लगातार अपनी जगह खोने का डर रहेगा, तो वे टीम की जीत से ज्यादा अपने स्थान को बचाने की चिंता करने लगेंगे। विशेष रूप से टी20 जैसे तेज प्रारूप में यह स्थिति टीम के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है।
अश्विन का मानना है कि यदि बल्लेबाज यह सोचकर मैदान में उतरेंगे कि कम रन बनाने पर उन्हें अगली ही श्रृंखला से बाहर कर दिया जाएगा, तो वे खुलकर खेलने के बजाय केवल अपनी जगह सुरक्षित रखने की कोशिश करेंगे। इससे टीम की आक्रामक बल्लेबाजी और जीत की रणनीति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि भविष्य में संजू सैमसन को फिर मौका मिलता है, तो स्वाभाविक रूप से उनके मन में भी अपनी जगह बचाने का दबाव रहेगा। ऐसी स्थिति में यदि वह तेज बल्लेबाजी करने के बजाय अपना अर्धशतक पूरा करने के लिए कुछ अतिरिक्त गेंदें खेलते हैं, तो उसके लिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अश्विन के अनुसार यह दबाव चयन प्रक्रिया से पैदा होता है और इसका समाधान निकालना जरूरी है।
पूर्व भारतीय स्पिनर ने घरेलू क्रिकेट के प्रदर्शन और राष्ट्रीय टीम में चयन को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि किसी खिलाड़ी का एक घरेलू सत्र में 500 से अधिक रन बना लेना अपने आप भारतीय टीम में जगह मिलने की गारंटी नहीं हो सकता। यह टिप्पणी उन्होंने उन चर्चाओं के जवाब में की, जिनमें प्रभसिमरन सिंह को टीम में मौका दिए जाने की मांग की जा रही थी।
अश्विन ने उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी तमिलनाडु प्रीमियर लीग टीम में हनी सैनी नाम के एक अच्छे फिनिशर हैं और बेंगलुरु ड्रैगन्स के बीआर शरद भी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। यदि केवल घरेलू प्रदर्शन के आधार पर सभी खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम में जगह दी जाने लगे, तो फिर ऐसे कई अन्य खिलाड़ियों को भी जिम्बाब्वे दौरे पर भेजना पड़ेगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभसिमरन सिंह एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया है। ऐसे खिलाड़ियों को मौका मिलने पर चर्चा हो सकती है, लेकिन केवल एक अच्छे घरेलू सत्र के आधार पर भारतीय टीम में चयन तय नहीं किया जा सकता। अश्विन का मानना है कि चयन प्रक्रिया में निरंतरता, खिलाड़ियों पर भरोसा और स्पष्ट रणनीति होना उतना ही जरूरी है, जितना कि प्रदर्शन को महत्व देना।
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