भारत की राजधानी दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की ऐतिहासिक मेजबानी कर रही है। बड़ी-बड़ी शक्तियां भारत में कदम रख रही हैं। चीनी राष्ट्रपति श्री जिंगपिंग के भारत दौरे पर जहां दुनिया की नजरें निगाहें बनी हुई है, वहीं दूसरी तरफ रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन दिल्ली में दस्तक दे चुके हैं। जिस वक्त पुतिन ने भारत में कदम रखा, दुनिया देखती रह गई। लेकिन असली खेल तो पुतिन के भारत में कदम रखने से ठीक पहले हुआ। पुतिन की वजह से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रदेश में कुछ ऐसा हुआ जिसने ग्लोबल डिप्लोमेसी से लेकर एिएशन सेक्टर में तहलका ही मचा दिया। जब राष्ट्रपति पुतिन भारत की धरती पर कदम रखने वाले थे। उससे पहले ही रूस ने सीएम योगी और उनके ड्रीम प्रोजेक्ट को एक ऐसा इंटरनेशनल सरप्राइज दे दिया जिसकी गूंज पूरे भारत से लेकर मॉस्को तक सुनाई दे रही है। बड़ा तोहफा यह है कि ब्रिक्स सम्मेलन के सुरक्षा इंतजामों के बीच रूसी वायु सेना और राष्ट्रपति पुतिन की एडवांस सिक्योरिटी का पूरा भारी भरकम जत्था दिल्ली के आईजीआई की बजाय सीधे ग्रेटर नोएडा के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतार दिया गया। यह जेवर एयरपोर्ट के रनवे पर किसी भी विदेशी सैन्य विमान की सबसे पहली लैंडिंग है। जो तीन रूसी जहाज जेवर एयरपोर्ट पर उतरे हैं, उसमें रूसी मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट आईएल76 भी है। इस विमान से रूस की एक एडवांस टीम और मिलिट्री अधिकारी भारत पहुंचे हैं। तो रूसी विमान की लैंडिंग में यूपी के इस इंटरनेशनल जेवर एयरपोर्ट की ब्रांडिंग पूरी दुनिया में हो रही है। चारों तरफ जेवर एयरपोर्ट की चर्चा हो रही है। तारीफ हो रही है।
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इस विशालकाय विमान के साथ रूसी सेना के दो और रणनीतिक प्लेन जेवर एयरपोर्ट के रनवे पर एक-एक कर लैंड हुए। किसी भी नए और आधुनिक एयरपोर्ट के लिए सबसे बड़ी बात और क्या हो सकती है कि उसकी पहली अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग ही दुनिया की सुपर पावर रूसी सेना के भारीभरकम विमानों के साथ हुई है। इन विमानों में रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले हाई लेवल एडवांस सिक्योरिटी तीन रूसी सेना के शीर्ष अधिकारी और अत्याधुनिक सर्िलांस उपकरण भारत पहुंचे हैं। इतना ही नहीं इन कार्गो प्लेंस के पिछले हिस्से में राष्ट्रपति पुतिन के स्पेशल काफिले में शामिल होने वाली बेहद खतरनाक और बख्तरबंद बुलेट प्रूफ गाड़ियां और सीक्रेट सेटेलाइट कम्युनिकेशंस व्हीकल्स भी उतारे गए हैं। हालांकि राष्ट्रपति पुतिन का अपना वीवीआईपी प्लेन दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लैंड हुआ। लेकिन उनकी पूरी बैकअप सिक्योरिटी और फ्लट का हब बना योगी का उत्तर प्रदेश। आमतौर पर किसी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े इवेंट या वीवीआईपी मूवमेंट के लिए दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट का इस्तेमाल ही किया जाता है। तमाम देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष जब आए हैं, दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर ही उनका काफिला और उनके सुरक्षा इक्विपमेंट उतारे गए हैं। लेकिन ब्रिज सम्मेलन के दौरान वायुसेना और नागरिक उड़न मंत्रालय के विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल और एक्स्ट्रा एयर ट्रैफिक को मैनेज करने के लिए जेवर एयरपोर्ट को पहली पसंद बनाया गया।
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जेवर के रनवे पर उतरे तीनों रूसी सैन्य विमान इस वक्त पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं। जेवर एयरपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपयोगिता, क्षमता और सुरक्षा मानकों को साबित कर दिया है। रूस के इस कदम ने जेवर एयरपोर्ट को वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में ला दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए एक बड़ा कूटनीतिक और आर्थिक माइलेज है। क्योंकि जिस जेवर एयरपोर्ट को यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर के मुख्य स्तंभ के रूप में पेश किया जा रहा है। उसकी पहली ही परीक्षा रूसी राष्ट्रपति के बेड़े ने पास कर दी है। लेकिन अगर आप ध्यान से कड़ियों को जोड़ेंगे तो आपको समझ में आ जाएगा कि रूस और योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश का यह नाता कोई अचानक हुआ संयोग मात्र नहीं है। उत्तर प्रदेश आज भारत और रूस के बीच सुरक्षा संयोग का सबसे बड़ा स्थान बन चुका है। वो कैसे? चलिए आंकड़ों के साथ ही बता देते हैं। यूपी की राजधानी लखनऊ में भारत और रूस का सबसे आधुनिक और बड़ा ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण केंद्र काम कर रहा है। वो सीएम योगी आदित्यनाथ के प्रोफाइल और प्राथमिकताओं में यह सुपरसोनिक मिसाइल प्रोजेक्ट हमेशा प्राथमिकता पर रहता है। अमेठी में रूस के तकनीकी सहयोग से भारतीय सेना के लिए दुनिया के सबसे घातक AK203 असॉल्ट राइफल्स का बड़े पैमाने पर उद्घाटन किया जा रहा है। यानी चाहे ब्रह्मोस जैसी आधुनिक मिसाइलें हो। AK203 जर्सी असॉल्ट राइफल हो या फिर रूसी सेना के विशालकाय मिलिट्री कार्गो एयरक्राफ्ट।
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