भारत में धीरे-धीरे प्रोस्टेट कैंसर एक ‘साइलेंट किलर’ के रूप में बढ़ता जा रहा है। लेकिन सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि भारतीय पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर का पता अक्सर बहुत देर से चलता है। जब तक कि यह बीमारी गंभीर रूप न ले ले, तब तक इसके बारे में पता नहीं चलता है। आखिर हमारे देश में इन गंभीर और जानलेवा बीमारी की पहचान इतनी देर में क्यों होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों और मुख्य कारणों के बारे में बताने जा रहे हैं।
जागरूकता न होना और लक्षणों की अनदेखी करना
प्रोस्टेट कैंसर के देरी से पकड़े जाने की सबसे बड़ी वजह जागरुकता का अभाव है। अक्सर पुरुष शुरूआती लक्षणों को सिर्फ ‘बढ़ती उम्र का असर’ समझकर नजरअंदाज करने की गलती करते हैं। वहीं लोग इन शुरुआती लक्षणों को भी गंभीरता से नहीं लेते हैं।
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लक्षण
पेशाब करते समय जलन महसूस होना
बार-बार पेशाब आना
रात के समय टॉयलेट के लिए बार-बार उठना
पेशाब का रुक-रुक कर आना
शर्म और हिचकिचाहट
आज भी हमारे समाज में पुरुष स्वास्थ्य संबंधी निजी समस्याओं पर खुलकर बात नहीं करते हैं। प्रोस्टेट जैसी बीमारी के बारे में डॉक्टर से बात करने में शर्म और संकोच महसूस करते हैं। इसी हिचकिचाहट की वजह से पुरुष अपनी तकलीफ को छिपाते रहते हैं और सही समय पर जांच नहीं हो पाती है।
सुविधाओं का अभाव
ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है। कई जगहों पर कैंसर की जांच के लिए आधुनिक मशीनें और सुविधाएं नहीं हैं। वहीं आर्थिक परेशानी और बड़े अस्पतालों तक लंबी दूरी तय करने की मजबूरी की वजह से भी लोग लंबे समय तक जांच को टालते रहते हैं।
रूटीन हेल्थ चेकअप न कराना
भारत में अभी भी रूटीन हेल्थ चेकअप कराने का चलन काफी कम है। इसलिए डॉक्टर की सलाह है कि 50 साल से अधिक उम्र के पुरुषों को समय-समय पर प्रोस्टेट की जांच जरूर कराना चाहिए। लेकिन अधिकतर लोग डॉक्टर के पास तभी जाते हैं, जब उनकी समस्या बर्दाश्त के बाहर होती है।
समय पर स्क्रीनिंग
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो कई मामलों में शुरूआती चरण में यह बीमारी बिना किसी बड़े या स्पष्ट लक्षणों के शरीर खमोशी से पनपती है। यही कारण है कि समय पर स्क्रीनिंग कराना बेहद जरूरी है। अगर बीमारी को शुरूआती चरण में पकड़ लिया जाए, तो इसके इलाज के सफल होने के चांसेज काफी ज्यादा बढ़ जाते हैं।
जानिए समाधान
समाज में प्रोस्टेट कैंसर को लेकर जागरुकता बढ़ाई जानी चाहिए। वहीं पुरुषों को भी यह समझना होगा कि वह बिना किसी संकोच या शर्म के डॉक्टर के सामने अपने परेशानियों को साझा कर सकते हैं। सही जानकारी, नियमित जांच और सही समय पर उठाया गया कदम इस ‘साइलेंट किलर’ के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
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