संकट में भी अवसरवादिता नहीं
सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि उनकी बेटी पिछले तीन दिनों से दुबई में फंसी हुई थी. इस दौरान जो अनुभव सामने आए वे किसी भी राष्ट्र के लिए प्रेरणादायक हो सकते हैं. आमतौर पर संकट के समय सेवाओं के दाम आसमान छूने लगते हैं लेकिन दुबई में इसके उलट स्थिति दिखी:
· नो ओवरचार्जिंग: भारी मांग के बावजूद होटलों ने कमरे के दाम नहीं बढ़ाए.
· किराये में स्थिरता: एयरलाइंस और स्थानीय टैक्सी सेवाओं ने सामान्य दरें ही वसूलीं जिससे यात्रियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ा.
· सामाजिक संवेदनशीलता: स्थानीय नागरिक और भारतीय समुदाय मिलकर फंसे हुए लोगों की मदद के लिए आगे आए.
पीएम मोदी और यूएई नेतृत्व की मित्रता का असर
प्रवीण खंडेलवाल ने इस सुरक्षित वापसी और बेहतर समन्वय का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के बीच के संबंधों को दिया. उन्होंने कहा कि भारत और यूएई के बीच का मजबूत विश्वास ही संकट के समय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है. भारतीय दूतावास और मिशन लगातार फंसे हुए लोगों के संपर्क में रहे जिसके चलते वायु मार्ग खुलते ही महज 2-3 घंटों के भीतर 9 उड़ानें भारत के लिए रवाना हो सकीं.
सांसद ने यूएई के इस अनुशासित आचरण को भारत के लिए भी एक सीख बताया. उन्होंने अपील की कि संकट के समय अवसरवादिता से दूर रहना ही एक सच्चे नागरिक की पहचान है. राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों से नहीं, बल्कि नागरिकों के संयम और ईमानदारी से होता है.
सवाल-जवाब
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल की बेटी दुबई में क्यों फंसी थीं?
सौम्या खंडेलवाल व्यापारिक कार्य से दुबई गई थीं, लेकिन इजरायल-ईरान युद्ध के कारण उत्पन्न असामान्य स्थितियों और हवाई मार्ग बंद होने से वहां फंस गई थीं.
दुबई की व्यवस्था के बारे में सांसद ने क्या खास बात बताई?
उन्होंने बताया कि वहां संकट के बावजूद होटलों, एयरलाइंस और टैक्सी सेवाओं ने ओवरचार्जिंग नहीं की और पूरी संवेदनशीलता के साथ लोगों की मदद की.
भारतीयों को वापस लाने में दूतावास की क्या भूमिका रही?
भारतीय मिशन लगातार यात्रियों के संपर्क में था और वायु मार्ग खुलते ही केवल 2-3 घंटों में नौ उड़ानों के जरिए भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की गई.
सांसद ने यूएई के इस आचरण से क्या सीख लेने को कहा?
उन्होंने कहा कि संकट के समय अनुचित लाभ न उठाना ही एक जिम्मेदार राष्ट्र की पहचान है, और भारतीय नागरिकों को भी आपदा में अवसर खोजने के बजाय जिम्मेदारी निभानी चाहिए.
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