प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (16 मई 2026) को रॉयल पैलेस में नीदरलैंड के राजा विलेम-अलेक्जेंडर और रानी मैक्सिमा से मुलाकात की. इसके बाद पीएम मोदी ने बताया कि 11वीं शताब्दी (Chola Era) के चोल राजवंश के तांबे के पत्र (कॉपर प्लेट्स)अब नीदरलैंड्स से वापस भारत लाए जाएंगे. इस ऐतिहासिक फैसले को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हर भारतीय के लिए बेहद खुशी का पल है.
भारत लाए जाएंगे चोल राजवंश के ताम्र-पत्र
पीएम मोदी एक्स पर तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, ‘हर भारतीय के लिए बेहद खुशी का पल! चोल राजवंश के तांबे के पत्र (ताम्र-पत्र) नीदरलैंड से भारत वापस लाए जाएंगे. प्रधानमंत्री रॉब जेटेन की मौजूदगी में, मैंने इस समारोह में हिस्सा लिया. ये चोल कॉपर प्लेट्स कुल 24 प्लेटों का एक सेट है, जिसमें 21 बड़ी और 3 छोटी प्लेटें हैं. इन पर दुनिया की सबसे खूबसूरत भाषाओं में से एक तमिल भाषा में लेख लिखे हुए हैं. ये दस्तावेज महान राजा राजेंद्र चोल प्रथम (Rajendra Chola I) के समय के हैं, जिन्होंने अपने पिता, राजा राजराजा प्रथम द्वारा किए गए एक मौखिक वादे को औपचारिक रूप दिया था.’
पीएम मोदी ने लिखा, ‘ये चोलों की महानता को भी दर्शाते हैं. हम भारतीय चोलों, उनकी संस्कृति और उनकी समुद्री ताकत पर बेहद गर्व करते हैं. मैं नीदरलैंड सरकार और विशेष रूप से लीडेन विश्वविद्यालय का आभार व्यक्त करता हूं, जहां ये ताम्र-पत्र 19वीं सदी के मध्य से संभालकर रखा गया था.’ ये तांबे की प्लेटें एक सौ साल से ज्यादा समय तक डच प्रशासन के पास रहीं.
Sharing my remarks during the CEOs Roundtable in the Netherlands. https://t.co/wVpjGnbuIZ
— Narendra Modi (@narendramodi) May 16, 2026
नीदरलैंड और भारत मिलकर काम कर रहे: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और नीदरलैंड एक विश्वसनीय, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार आपूर्ति शृंखला बनाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा, ‘ऊर्जा सुरक्षा से लेकर जल संरक्षण तक, नीदरलैंड और भारत मिलकर काम कर रहे हैं. हरित हाइड्रोजन पर हमारा सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है. भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौता भारत और नीदरलैंड के बीच साझेदारी को और मजबूत करेगा.’
नीदरलैंड के ट्यूलिप के लिए प्रसिद्ध होने की बात का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत कमल के लिए प्रसिद्ध है. उन्होंने कहा, ‘ट्यूलिप और कमल दोनों हमें सिखाते हैं कि जड़ें चाहे पानी में हों या धरती में, दोनों को सुंदरता और शक्ति प्राप्त होती हैं. भारत और नीदरलैंड अंतरराष्ट्रीय मंच पर समन्वय स्थापित कर सकते हैं और वैश्विक परियोजनाओं को हासिल करने के लिए मिलकर काम कर सकते हैं.’ उन्होंने यह भी कहा कि समय के साथ कई सभ्यताएं मिट गईं, लेकिन भारत की विविधतापूर्ण संस्कृति आज भी यहां के लोगों के दिलों में बसी हुई है.
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