प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 घंटे के भीतर दूसरी बार जनता से सोने की खरीद कम करने, फर्टिलाइजर का सीमित उपयोग करने और ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने की अपील की. ऐसा पहली बार नहीं है जब भारत की सरकार ने लोगों से सोने खरीद कम करने की अपील की है. समय-समय पर आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को बचाने के लिए सरकार ने जनता से सोना न खरीदने या कम खरीदने की अपील की है.
पीएम मोदी ने सोना नहीं खरीदने की अपील की
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 मई 2026) को हैदराबाद में नागरिकों से अपील की थी कि वे अपनी दैनिक आदतों में बदलाव लाकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दें. उन्होंने लोगों से एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचने का आग्रह किया. साथ ही, उन्होंने पेट्रोल और डीजल के संयमित उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि तेल की बचत से देश की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी. पीएम मोदी ने ईंधन की खपत कम करने के लिए कई सुझाव दिए. उन्होंने कहा कि जहां संभव हो, वहां मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें. निजी वाहनों के इस्तेमाल के दौरान कार-पूलिंग अपनाएं.
UPA सरकार में मंत्री चिदंबरम ने की थी अपील
साल 2013 में जब पी. चिदंबरम यूपीए (UPA) सरकार में केंद्रीय वित्त मंत्री थे तब उन्होंने भारत के लोगों से सोना नहीं खरीदने की अपील की थी. उन्होंने तब कहा था कि गोल्ड के लगातार आयात से देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ता जा रहा है और रुपया कमजोर हो रहा है. चिदंबरम ने कहा था, ‘जो लोग सोना खरीदना चाहते हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि कीमती धातु का हर एक अंश आयात किया जाता है और भारत में सोने का उत्पादन नहीं होता है. आप रुपये देते हैं, हमें डॉलर देने पड़ते हैं. आपको लगता है कि आप रुपये में सोना खरीदते हैं, लेकिन असल में आप डॉलर में सोना खरीदते हैं. मैं एक बार फिर सभी से अपील करता हूं कि कृपया सोना खरीदने से बचें.’
उन्होंने कहा था, ‘अगर भारत के लोग एक साल तक सोने का आयात न करें तो पूरी स्थिति में जबरदस्त बदलाव आएगा. अगर हम छह महीने या एक साल तक सोने की खरीद बंद करें तो CAD की स्थिति में जबरदस्त सुधार होगा.’ तत्कालीन सरकार ने सरकार ने सोने पर आयात शुल्क (Import Duty) बढ़ाकर 10 फीसदी कर दिया था.
भारत-चीन युद्ध के बाद 1962-1963
1962 के युद्ध के बाद भारत की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर संकट गहरा गया था. तत्कालीन वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने सोने की खरीद को सीमित करने के लिए सख्त नियम बनाए थे. तत्कालीन सरकार गोल्ड कंट्रोल रूल्स (1963) लेकर आई थी, जिसका उद्देश्य देश में सोने की तस्करी को रोकना और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना था. सरकार ने साल 1963 में 14 कैरेट से अधिक शुद्धता वाले सोने के आभूषण बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया था, ताकि सोने की खपत कम हो सके. साल 1968 में इस अधिनियम को और अधिक कड़ा कर दिया था, जिसके तहत नागरिकों के लिए गोल्ड बार या सिक्के रखना अवैध हो गया.
भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान साल 1965 में तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और युद्ध की जरूरतों को पूरा करने के लिए जनता से अपील की थी कि वे अपना सोना सरकार के पास जमा करें. इसके लिए सरकार ‘नेशनल डिफेंस गोल्ड बॉन्ड’ जैसी योजनाएं लेकर आई थी, जिसके तहत लोगों को अपना सोना सरकार को जमा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया था.
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