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मोदी ने कहा कि किसी भी कांग्रेसी राज्य सरकार को दोबारा सत्ता नहीं मिली है। सरकार बनने के कुछ ही महीनों के भीतर कांग्रेस के खिलाफ सत्ता-विरोधी लहर शुरू हो जाती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कांग्रेस को सिर्फ धोखा देना आता है। वे खुद झूठे हैं और उनके वादे भी झूठे हैं। कांग्रेस की सत्ता की किताब में शासन का अध्याय तो है ही नहीं। प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु में कांग्रेस पर अपने दीर्घकालिक सहयोगी डीएमके के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया और कहा कि राजनीतिक समीकरण बदलते ही पार्टी अक्सर गठबंधन सहयोगियों के खिलाफ हो जाती है। उन्होंने आगे कहा कि परजीवी कांग्रेस को अब प्रासंगिक बने रहने के लिए किसी और पार्टी की जरूरत है, जिसके सहारे वह सत्ता में बनी रह सके।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी लगातार चुनावी हार को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं और इसके लिए लोकतांत्रिक संस्थाओं, अदालतों और संवैधानिक प्रक्रियाओं को दोषी ठहरा रहे हैं। मोदी ने टिप्पणी की, संविधान, लोकतंत्र, संवैधानिक प्रक्रियाओं और अदालतों के प्रति इतनी नफरत मैंने अपने सार्वजनिक जीवन में किसी भी मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टी को करते नहीं देखा। पार्टी की गिरती लोकप्रियता पर प्रकाश डालते हुए मोदी ने याद दिलाया कि कांग्रेस ने कभी 400 से अधिक लोकसभा सीटें जीती थीं, लेकिन अब गठबंधन के बावजूद 100 सीटें पार करने के लिए संघर्ष कर रही है।
उन्होंने इसकी तुलना भाजपा के राष्ट्रीय विस्तार से करते हुए कहा, “महज 10 साल पहले, यानी पिछले चुनाव से ठीक पहले, बंगाल में हमारे पास सिर्फ तीन विधायक थे… आज भारतीय जनता पार्टी के पास 200 से अधिक विधायक हैं। अब केरल में भी हम एक से तीन विधायकों तक पहुंच गए हैं। और जब यह संख्या तीन तक पहुंच जाएगी, तो वह दिन दूर नहीं जब केरल में भाजपा-एनडीए गठबंधन के विधायकों की संख्या भी तीन से बढ़कर बहुमत का आंकड़ा पार कर जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि भाजपा केरल में धीरे-धीरे अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है।
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मोदी ने आगे कहा कि विभिन्न राज्यों में कांग्रेस सरकारें अस्थिरता और टूटे वादों से ग्रस्त रही हैं। कर्नाटक का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी पार्टी शासन करने के बजाय आंतरिक कलह में उलझी हुई है, और कहा कि यह तय नहीं है कि यह मुख्यमंत्री कितने दिन रहेंगे। यह भी तय नहीं है कि किसी और को मौका मिलेगा या नहीं; उन्होंने इसे अधर में लटका रखा है।
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