उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है जिसमें मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मामलों में कथित तौर पर वैधानिक दायित्वों का उल्लंघन करने को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। अधिवक्ता चांद कुरैशी के माध्यम से अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर याचिका में अनुरोध किया गया है कि ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों, जारी दिशा-निर्देशों और किए गए सॉफ्टवेयर बदलावों को असंवैधानिक और अमान्य घोषित किया जाए।
याचिका में यह भी अनुरोध किया गया है कि एसआईआर से संबंधित ऐसे सभी फैसलों को अवैध घोषित किया जाए और मूल ‘फॉर्म-6’ को बहाल किया जाए। इसके अलावा याचिका में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से कथित तौर पर करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का भी अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ता ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, उप निर्वाचन आयुक्त मनीष गर्ग और निर्वाचन आयोग की आईटी प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन अधिकारियों ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत अपने वैधानिक दायित्वों का उल्लंघन किया।
यह याचिका समाचारपत्र ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद दाखिल की गई है जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्ट का हवाला देते हुए याचिका में कहा गया है कि तीन सदस्यीय निर्वाचन आयोग में एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर बार-बार मतभेद सामने आए।
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