लंदन से 120 किमी दूर पीटरबरो में 40 साल पुराने मंदिर और कम्युनिटी सेंटर की बिक्री को पर विवाद हो गया है। पीटरबरो सिटी काउंसिल ने न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स को नीलामी के बाद एक मुस्लिम संस्था, यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन, को बेचने का फैसला किया है। इसी परिसर में भारत हिंदू समाज का मंदिर चलता है, जो शहर और आसपास रहने वाले हजारों हिंदुओं का प्रमुख पूजा और सांस्कृतिक केंद्र है। फैसले से नाराज भारत हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बिक्री प्रक्रिया को चुनौती दी है। भारत हिंदू समाज संगठन का आरोप है कि काउंसिल ने मंदिर की करीब 40 साल पुरानी धार्मिक और सामुदायिक भूमिका को नजरअंदाज किया। नीलामी के मूल्यांकन में भी गंभीर खामियां रहीं। बता दें कि फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए काउंसिल को बिक्री पूरी करने जैसे किसी भी कदम से रोक दिया था। अब न्यायिक समीक्षा में यह जांच हो रही है कि फैसला लेने की प्रक्रिया कानून के मुताबिक थी या नहीं। मंदिर प्रबंधन ने साफ किया है कि उसका विरोध मुस्लिम संस्था से नहीं, बल्कि काउंसिल के फैसले और प्रक्रिया से है। अब कोर्ट जांच करेगा कि संपत्ति बेचने का फैसला कानून और समानता के नियमों के मुताबिक लिया गया था या नहीं। मंदिर बंद होने से 56 किमी दूर जाने को मजबूर होंगे हिंदू भारत हिंदू समाज का कहना है कि पीटरबरो का यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इलाके के 4,000 हिंदुओं का एकमात्र सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र भी है। यदि यह परिसर बंद होता है, तो हिंदुओं को पूजा-अर्चना व त्योहारों के लिए निकटतम मंदिर (कैंब्रिज-56 किमी) या (लेस्टर-64 किमी) का रुख करना पड़ेगा। घाटे के चलते बेचने पड़ रहे हैं परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व क्लब पीटरबरो का विवाद ब्रिटेन में अकेला नहीं है। यहां की काउंसिलें बढ़ते खर्च व कम सरकारी मदद के कारण सामाजिक परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व कम्युनिटी भवन बेचकर बजट संभाल रही हैं। 2025 के ‘की सिटीज’ सर्वे में 60% काउंसिलों ने संपत्ति बिक्री को घाटा भरने का रास्ता बताया। बर्मिंघम को 24-25 का बजट संतुलित करने के लिए 2,883 करोड़ रु. की संपत्तियां बेचने का लक्ष्य रखना पड़ा। नॉटिंघम का 2025-26 घाटा 267 करोड़ और चार वर्षों का कुल अनुमानित अंतर 689 करोड़ रु. था। नीलामी में खामियां, समीक्षा बिना मंजूरी दी गई भारत हिंदू समाज का आरोप है कि बिक्री के दौरान दोनों पक्षों की बोलियों का ठीक मूल्यांकन नहीं हुआ। अदालत में संगठन ने कहा कि काउंसिल ने जांच और स्कोरिंग में गलतियां कीं। इसके बाद काउंसिल सदस्यों ने उन्हीं सिफारिशों को पड़ताल के बिना स्वीकार कर लिया। संगठन का कहना है कि मामला केवल ऊंची बोली का नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल का भी है। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें…
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