महिलाओं में उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर कई तरह के हार्मोनल बदलाव शरीर में देखे जाते हैं। इसका असर इनकी सेहत पर भी होता है। अब बात चाहे पीरियड्स की हो, प्रेग्नेंसी की हो, पोस्टपार्टम की हो, पेरिमेनोपॉज की हो या मेनोपॉज की। महिलाओं के शरीर में उम्र के साथ कई तरह के बदलाव देखे जाते हैं। इस दौरान सेहत का ख्याल रखना भी बेहद जरुरी होता है।
खासकर 40 साल की उम्र के बाद यानी ये समय जब पेरिमेनोपॉज शुरु होता है और शरीर धीरे-धीरे मेनोपॉज की तरफ जाता है, तो महिलाओं के शरीर में काफी बदलाव देखे जाते हैं। खासतौर पर पीरियड्स का अनियमित होना, हॉट फ्लैशेज, रात में पसीना आना, वजन बढ़ना, मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन जैसे लक्षण नजर आते हैं। इस समय पर डाइट में कुछ खास चीजों को शामिल किया जाता है।
पेरिमेनोपॉज में महिलाओं को जरूर खाने चाहिए ये फूड्स
– हेल्थ एक्सपर्ट भी मानते हैं कि महिलाओं को डाइट का खास ध्यान बेहद जरुरी होता है। इस दौरान आप फल, सब्जियां, नट्स, सीड्स और ऐसे मसालों को डाइट का हिस्सा जरुर बनाएं, जिससे इंफ्लेमेशन कम हो जाएं, एस्ट्रोजन को बैलेंस कर सके, ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस कर सके और शरीर को ताकत दें।
– इस समय पर स्किन, मूड और हार्ट हेल्थ को लेकर विशेष ध्यान देना और ऐसी चीजों का सेवन करें, जिससे आपकी त्वचा, मूड और हार्ट तीनों हेल्दी रहे।
– पेरिमेनोपॉज में अनार, सेब, आंवला और बेरीज खाएं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स और न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं। इन फलों में इंफ्लेमेशन कम होता है, हार्मोन्स बैलेंस रहते हैं, स्किन और हार्ट हेल्दी रहते हैं।
– इसके अतिरिक्त सब्जियों में आप ब्रॉकली, गाजर और गोभी खाएं। इनमें फाइबर और कैल्शियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। इनसे एस्ट्रोजन बैलेंस होता है, हड्डियां मजबूती होती हैं और शरीर डिटॉक्स होता है।
– फ्लैक्स सीड्स, कद्दू के बीज, अखरोट और तिल के बीज खाएं। इनमें फाइटोएस्ट्रोजन, ओमेगा-3 और मिनरल्स होते हैं, जो हॉट फ्लैशेज को कम करते हैं। वहीं मूड स्विग्ंस को सुधारके हैं और हार्मोन्स भी बैलेंस रहते हैं।
– आप अपनी डाइट में हल्दी, मेथी, दालचीनी और सौंफ के बीज को डाइट में शामिल कर सकते हैं। इनसे ब्लड शुगर लेवल रेगुलेट होता है, इंफ्लेमेशन कम होता है और पेरिमेनोपॉज में होने वाला हार्मोनल बदलाव आसानी से हो जाते हैं।
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