कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अरशद नदीम के बेहतर प्रदर्शन ना कर पाने को लेकर अब पाकिस्तान का खेल तंत्र सवालों के घेरे में है। अरशद के करीबी सूत्र ने बताया कि पिछले वर्ष के अंत से पीएएएफ और यहां तक कि पाकिस्तान खेल बोर्ड (पीएसबी) ने भी राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के दौरान अरशद को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया।
दक्षिण अफ्रीका के कोच टेर्सियस लीबेनबर्ग के मार्गदर्शन में पहले प्रशिक्षण ले चुके अरशद ने इस बार अपने स्थानीय कोच सलमान बट और स्थानीय प्रशिक्षकों के साथ तैयारी की। विडंबना यह रही कि लाहौर और ग्लास्गो की मौसम संबंधी परिस्थितियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थीं। बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेल 2022 में 90.12 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ स्वर्ण पदक जीतकर मौजूदा चैंपियन बने अरशद इस बार फाइनल में 80 मीटर का आंकड़ा भी पार नहीं कर सके। खराब प्रदर्शन के कारण वह शीर्ष आठ खिलाड़ियों के फाइनल के लिए भी क्वालीफाई नहीं कर पाए। उनके प्रशंसकों के लिए यह बड़ा झटका था क्योंकि 92.97 मीटर के रिकॉर्ड थ्रो के साथ ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले अरशद इस बार 80 मीटर की दूरी भी पार करने के लिए संघर्ष करते नजर आए। अरशद के लंबे समय से कोच रहे सलमान बट ने स्वीकार किया कि राष्ट्रमंडल खेलों में अरशद अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर नहीं थे और उनकी तैयारी भी पर्याप्त नहीं थी।
अरशद को पीएसबी और पीएएएफ से नहीं मिला सहयोग
अरशद को मैदान के बाहर भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। सबसे बड़ी समस्या यह रही कि पिछले वर्ष कोच सलमान को बनाए रखने को लेकर विवाद के बाद पाकिस्तान एमेच्योर एथलेटिक्स महासंघ (पीएएएफ) ने उनसे लगभग दूरी बना ली। अरशद के करीबी एक विश्वसनीय सूत्र ने बताया कि पिछले वर्ष के अंत से पीएएएफ और यहां तक कि पाकिस्तान खेल बोर्ड (पीएसबी) ने भी राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी के दौरान अरशद को अपेक्षित सहयोग नहीं दिया। सूत्र के अनुसार पीएएएफ ने उनकी तैयारियों से पूरी तरह किनारा कर लिया और प्रशिक्षण से संबंधित उनकी कुछ मांगों पर भी ध्यान नहीं दिया। इसी तरह पीएसबी ने भी लाहौर में प्रशिक्षण के लिए विदेशी कोच और प्रशिक्षकों की सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु कोई वित्तीय सहायता जारी नहीं की।
हुसैन शाह ने खेल ढांचे की आलोचना की
पूर्व ओलंपिक कांस्य पदक विजेता मुक्केबाज हुसैन शाह ने कहा, ”यह ऐसा खिलाड़ी है जिसने अपनी मेहनत के दम पर पहचान बनाई। वह एक गांव और कम आय वाले परिवार से आता है, लेकिन उसने स्वर्ण पदकों के जरिए पाकिस्तान को इतनी बड़ी उपलब्धियां दिलाईं। इसके बावजूद वह राष्ट्रमंडल खेलों की उचित तैयारी नहीं कर सका। यह हमारे खेल ढांचे की दुखद तस्वीर पेश करता है।” राष्ट्रमंडल खेलों में पाकिस्तान की पहली महिला पदक विजेता मुक्केबाज फातिमा जहरा ने भी कहा कि यदि उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और अधिक अंतरराष्ट्रीय अवसर मिले होते तो वह अपने भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीत सकती थीं। फातिमा ने मुक्केबाजी में कांस्य पदक जीता जो 36 सदस्यीय दल भेजने वाले पाकिस्तान का मौजूदा राष्ट्रमंडल खेलों में अब तक का एकमात्र पदक है।
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