गर्मी के चरम मौसम में कराची के लाखों लोग पानी की एक एक बूंद के लिए परेशान हैं। शहर के लगभग सत्तर प्रतिशत हिस्से में जलापूर्ति बुरी तरह प्रभावित बताई जा रही है। गुलिस्तान ए जौहर, गुलशन ए इकबाल, अजीजाबाद, लियाकताबाद, नार्थ नाजिमाबाद, नाजिमाबाद और नार्थ कराची जैसे इलाकों में कई सप्ताह से पानी का संकट बना हुआ है। हालात इतने खराब हैं कि लोगों को महंगे निजी टैंकरों से पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इसे भी पढ़ें: India के साथ खड़ा हो गया China! Pakistan हैरान, Shehbaz Sharif, Asim Munir के लौटते ही Jinping ने किया बड़ा खेल
यह संकट ऐसे समय सामने आया है जब पूरे पाकिस्तान में बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा है। त्योहार के दौरान पानी की मांग सामान्य दिनों से कहीं अधिक रहती है, लेकिन कराची में प्रशासन की नाकामी ने नागरिकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। बढ़ती गर्मी और घटती जलापूर्ति ने लोगों के सामने रोजमर्रा के जीवन का संकट खड़ा कर दिया है।
इस मुद्दे को लेकर जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान के प्रमुख हाफिज नईम उर रहमान ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सिंध में लगभग अठारह वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी कराची को पानी जैसी मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं करा सकी। उनका कहना है कि सरकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन ने हालात को विस्फोटक बना दिया है।
हाफिज नईम उर रहमान ने यह भी आरोप लगाया कि सिंध ठोस अपशिष्ट प्रबंधन बोर्ड को अरबों रुपये का बजट मिलने के बावजूद कुर्बानी के जानवरों के अवशेषों और कचरे के निपटान की व्यवस्था तक सही ढंग से नहीं हो सकी है। उन्होंने सरकार पर सार्वजनिक धन की बर्बादी और प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाया। साथ ही उन्होंने कराची के महापौर मुर्तजा वहाब के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि शहर में पानी की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि पूरा शहर जल संकट की मार झेल रहा है।
लेकिन पाकिस्तान की परेशानी केवल कराची तक सीमित नहीं है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित करने के फैसले ने पाकिस्तान की कृषि व्यवस्था की कमजोरियों को भी उजागर कर दिया है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और सामरिक अध्ययनों के अनुसार पाकिस्तान की लगभग अस्सी प्रतिशत कृषि सिंधु नदी तंत्र के जल पर निर्भर है। यही नदी तंत्र वहां की खाद्य सुरक्षा, सिंचाई व्यवस्था और जल विद्युत उत्पादन की रीढ़ माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जल प्रवाह और जल प्रबंधन को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है तो इसका सबसे बड़ा असर पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत के किसानों पर पड़ेगा। कई रिपोर्टों में चेतावनी दी गई है कि सिंचाई जल की कमी के कारण फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, खाद्यान्न संकट गहरा सकता है और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणों में यह भी कहा गया है कि सिंधु नदी तंत्र पाकिस्तान के लिए केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि जीवन रेखा है। तीन सौ मिलियन से अधिक लोगों की आजीविका, खेती और ऊर्जा व्यवस्था प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसी पर निर्भर है। ऐसे में भारत के साथ लगातार तनाव और आतंकवाद को लेकर बने विवादों ने पाकिस्तान की जल सुरक्षा को नए संकट में डाल दिया है।
कई विदेशी रिपोर्टों में पाकिस्तान के किसानों की चिंता भी सामने आई है। किसानों का कहना है कि जल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता सीधे उनकी फसलों, आय और भविष्य को प्रभावित करती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान ने अपने जल संसाधनों के प्रबंधन, भंडारण क्षमता और सिंचाई ढांचे को मजबूत नहीं किया तो आने वाले वर्षों में संकट और गहरा सकता है।
आज स्थिति यह है कि एक तरफ कराची के लोग बूंद बूंद पानी के लिए भटक रहे हैं, दूसरी तरफ सिंधु के जल पर आश्रित किसान भविष्य को लेकर चिंतित हैं। भारत विरोध और आतंकवाद पर नरम रुख की कीमत अब पाकिस्तान को जल, कृषि और अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर चुकानी पड़ रही है। जल संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक जिद और कुप्रबंधन का सबसे बड़ा बोझ अंततः आम जनता और किसानों को ही उठाना पड़ता है।
बहरहाल, भारत का रुख अब पहले की तुलना में कहीं अधिक स्पष्ट और कठोर दिखाई दे रहा है। नई दिल्ली लगातार यह संदेश देती रही है कि “खून और पानी साथ-साथ नहीं बह सकते।” भारत का मानना है कि सीमा पार आतंकवाद और सामान्य द्विपक्षीय संबंध एक साथ नहीं चल सकते। ऐसे में पाकिस्तान चाहे द्विपक्षीय माध्यम से सिंधु जल के मुद्दे पर राहत मांगने का प्रयास करे या अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी चिंता उठाए, भारत की प्राथमिकता आतंकवाद के खिलाफ ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई बनी रहेगी। जब तक पाकिस्तान अपनी धरती से संचालित आतंकवादी ढांचे पर निर्णायक प्रहार नहीं करता, आतंकवाद को संरक्षण देने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाता और भारत विरोधी गतिविधियों पर प्रभावी रोक नहीं लगाता, तब तक दोनों देशों के संबंधों में सामान्य स्थिति की वापसी संभव नहीं है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.