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भारतीय सेना ने 7 मई को जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें DGMO जनरल राजीव घई और एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने मीडिया को जानकारी दी।
ऑपरेशन सिंदूर के एक साल पूरे होने पर भारतीय सैन्य बलों की समीक्षा में कई अहम खुलासे हुए हैं। पाकिस्तान, चीन और तुर्किये की तिकड़ी ने चार मंसूबों से 7 और 8 मई की रात को 900 ड्रोन दागे थे। कश्मीर में LOC से लेकर गुजरात में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कुछ घंटों में स्वॉर्म ड्रोन दागे गए थे।
पाक के स्वॉर्म ड्रोन को भारतीय वायुसेना के एयर कमांड और कंट्रोल सिस्टम ने तबाह कर दिया। पाकिस्तान भारत के एक भी अहम सैन्य बेस को नुकसान पहुंचाने में सफल नहीं हो पाया।
पाकिस्तान ने यूक्रेन-रूस युद्ध में इस्तेमाल किए गए स्वॉर्म ड्रोन अटैक को कॉपी किया था। बता दें कि यह रणनीति अक्सर नाटो देशों की तरफ से एडवांस वॉर में अपनाई जाती है।

पाकिस्तान ने 4 मंसूबों के साथ प्लान बनाया था…
- भारतीय एयर डिफेंस को सस्ते ड्रोन से परेशान करना: भारत की एयर डिफेंस क्षमता को सस्ते ड्रोन मार गिराने में एग्जॉस्ट करना था। नए आकलन के अनुसार पाक को सस्ते ड्रोन उपलब्ध कराने में तुर्किये का पूरा योगदान था।
- ड्रोन हमलों से भारत पर महंगे युद्ध का भार थोपना: पाक, चीन व तुर्किये सस्ते एरियल हमलों से भारत पर बेहद महंगा आर्थिक युद्ध थोपने की फिराक में था। 30 से 50 हजार रुपए कीमत के ड्रोन दागकर भारत को आत्मरक्षा में ढाई करोड़ या फिर अधिक कीमत वाली मिसाइलें चलाने का मजबूर करना था।
- रडार और अन्य टोही नेटवर्क में घुसपैठ करना: भारत के रडार एवं अन्य सर्विलांस नेटवर्क को एक्सपोज करने के लिए मजबूर करना था। पाकिस्तान सिर्फ भारतीय कार्रवाई का जवाब देने के बजाय नेटवर्क वारफेयर की तैयारी कर चुका था। इसके लिए पाक को चीन ने अपना सर्विलांस सिस्टम बायडू भी दिया था।
- एरियल सर्विलांस में कमियों को उजागर करना: भारतीय एरियल सर्विलांस और डिफेंस में गैप और कर्मियों को उजागर करना था। लेकिन भारतीय वायु सेना के एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (आईएसीसीएस) की सफलता भी सामने आई है। सैन्य समीक्षा के अनुसार आईएसीसीएस से नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर की क्षमता साबित हुई।
सेना बोली- ऑपरेशन सिंदूर में 100+ पाकिस्तानी जवान मारे गए
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने गुरुवार को कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ संदेश दिया कि पाकिस्तान में कोई भी आतंकवादी ठिकाना सुरक्षित नहीं है। यह अभियान अंत नहीं, बल्कि शुरुआत थी। भारत आतंकवाद के खिलाफ लड़ता रहेगा।
जयपुर में गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सेना ने बताया, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 100 से ज्यादा जवानों और टेररिस्ट कैंप में 100 से ज्यादा आतंकियों की मौत हुई है।

ऐसे सिलेक्ट हुआ था ऑपरेशन सिंदूर का नाम और लोगो
8 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब सेना के अधिकारियों जानकारी देने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी, तब बताया था कि ऑपरेशन के लिए 5 नाम तय हुए थे। सबसे आखिर में 2 नाम ऑपरेशन मंगलसूत्र और सिंदूर चुना गया। पहलगाम आतंकी हमले में कई महिलाओं के सुहाग उजाड़े गए थे, इसलिए पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को मंजूरी दी।
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6-7 मई: रात 1.05 से 1.27 बजे
क्या हुआ: भारतीय वायुसेना ने 23 मिनट में पीओके और पाक के भीतर 9 आतंकी ठिकाने उड़ाए। 100 आतंकी मारे गए। शाम को पाक ने मिसाइलें दागीं। 15 शहर निशाने पर थे, पर हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने करारा जवाब दिया।
8 मई: देर रात 2 से सुबह 4 बजे
क्या हुआ: पाक ने लेह से गुजरात तक 1000 ड्रोन से 36 जगह हमला बोला। हमने 98% को मार गिराया। पाक के 4 एयर डिफेंस सिस्टम, एक रडार तबाह।
9 मई: रात 10:30 से 1:55 बजे
क्या हुआ: पाक ने 26 जगहों पर लंबी दूरी के हथियार दागे। भारत ने ड्रोन और सुखोई विमानों से ‘ब्रह्मोस’ दागी। इसने पाक के 11 एयरबेस और कई विमान तबाह किए।
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भारत में पहली बार 50 हजार जवानों की अलग ड्रोन फोर्स बनेगी, किसी भी सैन्य हमले में सबसे पहले यही प्रहार करेगी

ऑपरेशन सिंदूर और वैश्विक युद्धों (रूस-यूक्रेन व पश्चिम एशिया) से सबक लेते हुए भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने एक ‘ड्रोन फोर्स’ बनाने का निर्णय लिया है। यह फोर्स किसी भी सैन्य कार्रवाई में ‘फर्स्ट रेस्पोंडर’ (पहली जवाबी कार्रवाई) के तौर पर तैनात की जाएगी। इसे डेटा और कॉग्निटिव वारफेयर फोर्स का तकनीकी समर्थन होगा। पढ़ें पूरी खबर…
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