ओडिशा विधानसभा में बुधवार को विपक्षी सदस्यों ने स्कूली बच्चों की नयी पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों को लेकर विद्यालय एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड के इस्तीफे और संशोधित खनन कानून को वापस लेने की मांग करते हुए जोरदार हंगामा किया। इसके चलते सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी और कुल मिलाकर महज 11 मिनट ही कामकाज हो सका। विपक्षी विधायकों की इन्हीं मांगों के कारण मंगलवार को भी सदन की कार्यवाही केवल 13 मिनट ही चल पाई थी।
विपक्षी विधायकों के आसन के निकट आकर हंगामा किए जाने के बीच बुधवार को विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी और पूर्वाह्न सत्र में पांच मिनट एवं अपराह्न सत्र में छह मिनट यानी कुल 11 मिनट ही सदन का कामकाज हो सका। शोर-शराबे के कारण न तो प्रश्नकाल और न ही शून्यकाल हो सका। कार्यस्थगन प्रस्ताव पर भी चर्चा नहीं हो पाई।
हालांकि, अपराह्न सत्र में सरकार कुछ दस्तावेज सदन के पटल पर रखने में सफल रही। सुबह साढ़े 10 बजे प्रश्नकाल के लिए जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस के सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर मंत्री के इस्तीफे और नए खनन कानून को रद्द करने की मांग करते हुए आसन के निकट आ गए और हंगामा करने लगे। बीजद सदस्यों ने पाठ्यपुस्तकों में हुई त्रुटियों का मुद्दा उठाया, जबकि कांग्रेस विधायकों ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम (एमएमडीआर अधिनियम) को निरस्त करने की मांग की।
हंगामा कर रहे सदस्यों के एक समूह ने मेज पर चढ़कर विरोध किया, जबकि दूसरे समूह के सदस्यों ने अध्यक्ष के आसन पर चढ़ने का प्रयास किया। पाठ्यपुस्तकों में हुई त्रुटियों में महान वैज्ञानिक आइजक न्यूटन को ‘‘महानतम पायलट’’ बताया जाना, ओडिशा की नियमगिरि पहाड़ियों को झारखंड में दर्शाया जाना और कर्नाटक विधानसभा की तस्वीर छापकर उसके नीचे ओडिशा विधानसभा लिखा जाना शामिल हैं। खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 राज्य सरकारों को खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर अतिरिक्त कर या उपकर लगाने से रोकता है।
विपक्षी सदस्यों द्वारा सरकार के खिलाफ नारेबाजी के बावजूद सत्ता पक्ष के सदस्य अपनी सीट पर शांत बैठे रहे। हालांकि, हंगामा उस समय और बढ़ गया जब कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे विधानसभा के उपाध्यक्ष भवानी शंकर भोई ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री के.सी. पात्रा को विपक्षी सदस्यों के सवालों का जवाब देने की अनुमति दी। भोई के बार-बार आग्रह के बावजूद हंगामा कर रहे विधायक अपनी सीट पर नहीं लौटे।
इसके बाद विधानसभा उपाध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शुरू होने के महज पांच मिनट के भीतर शाम चार बजे तक के लिए स्थगित कर दी। सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला। हंगामा जारी रहने के कारण विधानसभा उपाध्यक्ष को सदन की कार्यवाही बृहस्पतिवार सुबह साढ़े 10 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद बीजद विधायक महात्मा गांधी मार्ग की ओर बढ़ गए, जहां पार्टी की युवा और छात्र इकाइयां गोंड के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। बीजद विधायक शारदा प्रसन्न जेना ने कहा कि राज्य सरकार जनता की आवाज नहीं सुन रही है और इसलिए उनके पास विधानसभा में हंगामा करने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। हालांकि, भाजपा विधायक इराशीष आचार्य ने विधानसभा की कार्यवाही बाधित करने के लिए विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार ने छात्रों को संशोधित पुस्तकें उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है और इन अनियमितताओं के सिलसिले में कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। विपक्ष अप्रासंगिक मांगें कर रहा है।
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