न्यूयॉर्क सिटी ने छोटी कक्षाओं के छात्रों के लिए Generative AI टूल्स पर एक साल का प्रतिबंध लगाया है। आइए आपको इसकी वजह बताते हैं और समझाते हैं कि ऐसा करना क्यों जरूरी था।
न्यूयॉर्क एजुकेशन डिपार्टमेंट के मुताबिक, AI से मिलने वाली जानकारी गलत या बायस भी हो सकती है। इसके अलावा, AI छात्रों के लिए वह सोचने का काम कर सकता है जिसे उन्हें खुद करना चाहिए। ऐसे में स्कूल प्रशासन का मानना है कि छोटी उम्र में बच्चों को पहले पढ़ने, लिखने, सवाल पूछने, समस्या हल करने और गलतियों से सीखने जैसी जरूरी क्षमताएं विकसित करनी चाहिए।
AI से ज्यादा जरूरी है शिक्षक और इंसानी कनेक्ट
न्यूयॉर्क का तर्क सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है। शहर का मानना है कि बच्चों के विकास में शिक्षक और दूसरे छात्रों के साथ बातचीत बेहद जरूरी है। अगर हर सवाल का जवाब chatbot देने लगे तो शिक्षक और छात्रों के बीच होने वाला कनेक्ट, डिस्कशन और कोलैबोरेशन प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से 2-K से 8वीं कक्षा तक स्टूडेंट्स-फेसिंग जेनरेटिव AI पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही AI कंपैनियन चैटबॉट्स पर सभी क्लासेज में बैन रहेगा। ऐसे chatbot बच्चों को बातचीत या इमोशनल कनेक्ट जैसा एक्सपीरियंस देने के लिए डिजाइन किए जाते हैं।
सिर्फ AI ही नहीं, Screen Time भी घटेगा
न्यूयॉर्क ने AI के साथ-साथ बच्चों के क्लासरूम स्क्रीन टाइम को भी कम करने की नीति लागू की है। 2-K से दूसरी कक्षा तक इंडिविजुअल स्क्रीन यूज की परमिशन नहीं होगी। तीसरी से पांचवीं कक्षा के छात्रों के लिए रोजाना 30 मिनट तक और छठी से आठवीं कक्षा के छात्रों के लिए 45 मिनट तक इंडिविजुअल स्क्रीन टाइम की सिफारिश की गई है। हालांकि, जरूरी एसिस्टिव टेक्नोलॉजी, असेसमेंट्स, कोडिंग, रोबोटिक्स और कुछ अन्य अप्रूव्ड एजुकेशनल एक्टिविटीज इसके एक्सेप्शन हैं।
एक साल तक होगा AI के असर की स्टडी
फैसला हमेशा के लिए AI बैन करने का ऐलान नहीं है। न्यूयॉर्क ने फिलहाल एक साल का प्रतिबंध लगाया है। 2026-27 के दौरान टेक्नोलॉजी इन स्कूल्स कोएलिशन छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों, एक्सपर्ट्स और अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ मिलकर AI के असर को स्टडी करेगी। इसके बाद भविष्य की नीति को लेकर फैसले लिए जाएंगे।
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