यूजीसी-नेट की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है। एजेंसी ने माना है कि इन तीनों प्रश्नपत्रों में इतनी अधिक गलतियां और दोहराए गए सवाल थे कि केवल कुछ प्रश्न हटाकर समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता था।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अनुसार, इन तीनों विषयों की नई परीक्षा 9 और 10 सितंबर को होगी। अंग्रेजी की परीक्षा 9 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक, जबकि वाणिज्य की परीक्षा उसी दिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक आयोजित की जाएगी। समाजशास्त्र की परीक्षा 10 सितंबर को सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक होगी। अभ्यर्थियों से दोबारा परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
मौजूद जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने रविवार को यूजीसी-नेट के 87 में से 84 विषयों की अस्थायी उत्तर कुंजी जारी कर दी थी, लेकिन अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र की उत्तर कुंजी रोक दी गई थी। यह फैसला जून में हुई परीक्षा के करीब सात सप्ताह बाद आया है।
एजेंसी ने बताया कि अभ्यर्थियों से बड़ी संख्या में शिकायतें मिलने के बाद एक समिति बनाई गई थी। समिति की जांच में प्रश्नपत्रों में कई तरह की गंभीर गलतियां सामने आईं। इनमें तथ्य संबंधी गलतियां, छपाई की गलतियां, अनुवाद की त्रुटियां, नामों की गलत वर्तनी, पुस्तकों के बिगड़े हुए नाम, गलत तरीके से लिखे गए सवाल, व्याकरण और विराम चिह्नों की गलतियां तथा स्थापित अवधारणाओं के लिए गैर-मानक शब्दों का इस्तेमाल शामिल था।
समिति को यह भी पता चला कि प्रश्नपत्रों में पहले पूछे जा चुके काफी सवाल दोबारा शामिल किए गए थे। अंग्रेजी विषय के अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि 150 में से 67 सवाल वर्ष 2024 की परीक्षा में पूछे गए सवालों से हूबहू मिलते थे। यहां तक कि विकल्पों का क्रम भी कथित तौर पर वही था। बाद में वाणिज्य के प्रश्नपत्र में भी सवाल दोहराए जाने की शिकायत सामने आई।
समाजशास्त्र के अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र में रिट्जर की जगह पुट्जर, पार्सन्स की जगह पार्सो और घुर्ये की जगह घुन्ये जैसे नाम लिखे जाने की शिकायत की थी। ए. आर. देसाई का नाम भी गलत तरीके से लिखा गया था। हिंदी अनुवाद और पाठ्यक्रम से जुड़े सवालों को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए थे।
गौरतलब है कि जून 2024 में भी यूजीसी-नेट परीक्षा को आयोजित होने के एक दिन बाद रद्द करना पड़ा था। गृह मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विश्लेषण इकाई से परीक्षा की विश्वसनीयता प्रभावित होने की जानकारी मिलने के बाद दोबारा परीक्षा कराई गई थी।
हालांकि इस बार बाकी 84 विषयों के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने कहा है कि इन विषयों के परिणाम तय समय पर जारी किए जाएंगे और कनिष्ठ शोध अध्येता आवंटन के साथ सहायक प्रोफेसर और पीएचडी पात्रता प्रमाणपत्र में देरी नहीं होगी। सहायक प्रोफेसर पात्रता के लिए सफल अभ्यर्थियों की संख्या जून की परीक्षा या दोबारा होने वाली परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों में से जिसकी संख्या अधिक होगी, उसके छह प्रतिशत के आधार पर तय की जाएगी।
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