NTA ने परीक्षाओं में गड़बड़ियों और प्रश्नपत्रों में गड़बड़ियों के बाद 600 विशेषज्ञों की टीम बदल दी है। अब नए प्रश्नपत्रों की 4-स्तरीय जांच व्यवस्था की जा रही है।
क्यों करनी पड़ी इतनी बड़ी कार्रवाई?
जून महीने में आयोजित यूजीसी नेट (UGC-NET) परीक्षा के बाद तीन प्रमुख विषयों—इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी के प्रश्नपत्रों को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया था। छात्रों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि सोशियोलॉजी के पेपर में स्पेलिंग, ग्रामर और ट्रांसलेशन की ऐसी बुनियादी गलतियां थीं, जिन्हें अनदेखा नहीं किया जा सकता था।
परीक्षा में जाने-माने विचारकों के नाम तक गलत लिखे गए थे; जैसे ‘Ritzer’ को ‘Putzer’, ‘Parsons’ को ‘Parsow’, ‘Ghurye’ को ‘Ghunye’ और ‘A R Desai’ को ‘A K Desai’ छाप दिया गया था। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया था कि हिंदी ट्रांसलेशन बेहद घटिया था और कुछ प्रश्न AI जनरेटेड लग रहे थे।
इन शिकायतों के बाद एनटीए द्वारा गठित विशेष समिति ने जांच में माना कि प्रश्नपत्रों में बेसिक नियम फॉलो नहीं किए गए थे। गलतियां इतनी अधिक थीं कि सिर्फ आंसर-की से कुछ सवाल हटाकर उन्हें ठीक नहीं किया जा सकता था। इसी वजह से एनटीए ने इन तीनों विषयों की परीक्षा रद्द कर दोबारा आयोजित करने का फैसला लिया।
री-टेस्ट और नई सुरक्षा व्यवस्था
यूजीसी नेट के इन तीनों विषयों का री-टेस्ट 9 और 10 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें करीब डेढ़ लाख उम्मीदवार शामिल होंगे। एनटीए सूत्रों के अनुसार, प्रश्नपत्र तैयार करने वाली नई टीम को जिम्मेदारी सौंप दी गई है और उसने हाल की कुछ परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार भी किए हैं।
एनटीए के इस आंतरिक ओवरहाल का मुख्य उद्देश्य देश भर के लाखों छात्रों का भरोसा जीतना और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की साख को दोबारा स्थापित करना है। नई 4-स्तरीय जांच व्यवस्था से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाली परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को किसी भी तरह की गड़बड़ी या असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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