बदलते मौसम में गले की खराश जैसी समस्याओं से निपटने के लिए दादी-नानी अक्सर काढ़ा पीने की सलाह देती हैं। लेकिन क्या हर समस्या के लिए एक ही तरह से काढ़ा बनाना ठीक है? यहां सीखिए किस समस्या के लिए कौन से इंग्रेडिएंट्स डालें।
1) गले में खराश
बदलते मौसम में गले में खराश होना एक कॉमन समस्या है। इस समस्या से निपटने के लिए मुलेठी और सौंफ मददगार साबित हो सकती हैं। सौंफ और मुलेठी गले की खराश में कुछ लोगों को आराम दे सकती हैं, खासकर मुलेठी गले को शांत करने के लिए पारंपरिक रूप से इस्तेमाल होती है। वहीं सौंफ पाचन को सपोर्ट करने में मददगार साबित होती है। जब भी गले में खराश हो तो आप इन दोनों चीजों को डालकर काढ़ा बनाएं। इसके लिए आधा चम्मच मुलेठी पाउडर को एक चम्मच कुटी सौंफ के साथ गरम पानी में मिलाएं। 5-7 मिनट के लिए ढक दें और फिर इसे घूंट-घूंट करके मिलाएं।
2) कफ और जकड़न
कफ और जकड़न की समस्या में आमतौर पर सांस की नलियों में सूजन या जलन और अतिरिक्त बलगम बनता है। इस समस्या से आराम पाने के लिए पिपली, अदरक और शहद फायदेमंद साबित हो सकता है। पिपली और अदरक गले में आराम और गर्माहट दे सकता है। कफ या सीने की जकड़न के इलाज के लिए ये फायदेमंद साबित हो सकता है। सांस से जुड़ी तकलीफों में आराम पाने के लिए इसका इस्तेमाल फायदेमंद साबित होता है। हालांकि, शहद खांसी से राहत दिला सकता है। इसके लिए एक चुटकी पिपली और सूखे अदरक में शहद मिलाएं और खाएं। ध्यान रखें कि एक साल से कम उम्र के बच्चों को शहद ना दें।
3) बंद नाक और मानसून में होने वाली जकड़न
इस समस्या से निपटने के लिए अजवायन और काली मिर्च का पानी पिएं। अजवाइन में थाइमोल जैसे खुशबूदार तत्व होते हैं, जबकि काली मिर्च से पाइपरिन मिलता है। पारंपरिक रूप से, सर्दी-जुकाम या छाती में जकड़न होने पर इन दोनों का इस्तेमाल शरीर को गर्माहट देने वाले नुस्खे के तौर पर किया जाता है। इसका इस्तेमाल करने के लिए एक कप पानी में आधा छोटा चम्मच अजवाइन और 2-3 कुटी हुई काली मिर्च डालकर धीमी आंच पर उबालें। इसे गर्म-गर्म धीरे-धीरे पिएं।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ सामान्य जानकारी के उद्देश्य के लिए लिखा गया है। ये किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का ऑप्शन नहीं है। किसी भी हेल्थ प्रॉब्लम से जुड़े सवालों के लिए हमेशा डॉक्टर की सलाह लें।
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