सबसे बड़ी गलती गलत या बिना Purpose Code के पैसे भेजना हो सकती है। विदेश से भारत आने वाली रकम के लिए बैंक को ट्रांसफर का उद्देश्य बताना होता है। यह रकम परिवार के खर्च, मेडिकल जरूरत, शिक्षा, निवेश, प्रॉपर्टी खरीद या अन्य वैध उद्देश्य के लिए हो सकती है। सही Purpose Code से बैंक और नियामक को यह समझने में मदद मिलती है कि पैसा भारत क्यों भेजा गया है। अगर जानकारी अधूरी या गलत हो, तो बैंक अतिरिक्त जांच कर सकता है या ट्रांजैक्शन में देरी हो सकती है। सीमा पार होने वाले लेनदेन पर FEMA, 1999 और RBI के नियम भी लागू होते हैं।
NRI भारत में पैसा रखने के लिए अलग-अलग बैंकिंग विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। NRE अकाउंट आम तौर पर विदेश में कमाई गई रकम रखने के लिए इस्तेमाल होता है और इसके फंड को निर्धारित नियमों के तहत वापस विदेश भेजा जा सकता है। NRO अकाउंट भारत में अर्जित आय जैसे किराया, पेंशन या निवेश से हुई आय को रखने के लिए उपयोग किया जाता है और इस पर मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में आता है। वहीं, FCNR अकाउंट में NRI कुछ निर्धारित विदेशी मुद्राओं में फिक्स्ड डिपॉजिट रख सकते हैं, जिससे मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
NRI के लिए भारत में परिवार को पैसे भेजने पर कोई सामान्य ऊपरी सीमा नहीं है, बशर्ते रकम अधिकृत बैंकिंग चैनल से भेजी जाए और पैसे का स्रोत वैध हो। हालांकि, जिस देश में NRI रह रहा है, वहां विदेशी मुद्रा और रिपोर्टिंग से जुड़े अलग नियम हो सकते हैं। इसलिए वहां के नियमों को भी देखना जरूरी है। दूसरी ओर अगर भारत में रहने वाला कोई व्यक्ति विदेश में परिवार को पैसे भेजता है, तो उस पर LRS (Liberalised Remittance Scheme) के नियम लागू होते हैं।
LRS के तहत निवासी भारतीय एक वित्तीय वर्ष में निर्धारित सीमा तक विदेशी मुद्रा भेज सकता है। इसलिए, NRI माता-पिता को पैसा भेजते समय सबसे जरूरी बात यह है कि लेनदेन बैंकिंग चैनल से करें, सही उद्देश्य दर्ज करें और पैसे के स्रोत व रिश्ते से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखें। इससे भविष्य में आयकर विभाग या बैंक की पूछताछ होने पर रकम की वैधता आसानी से साबित की जा सकती है।
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