भारतीय सड़कों पर मौजूद 30.48 करोड़ व्हीकल में से लगभग 16.54 करोड़ व्हीकल के पास अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं है। इससे दुर्घटना के शिकार लोगों और उनके परिवारों को देर से या अपर्याप्त मुआवजा मिलने का जोखिम रहता है। अब शीर्ष अदालत चाहती है कि केंद्र सरकार एक सरल नियम को लागू करके देखे।
भारतीय सड़कों पर मौजूद 30.48 करोड़ व्हीकल में से लगभग 16.54 करोड़ व्हीकल के पास अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं है। इससे दुर्घटना के शिकार लोगों और उनके परिवारों को देर से या अपर्याप्त मुआवजा मिलने का जोखिम रहता है। अब, अपने हालिया फैसले में शीर्ष अदालत चाहती है कि केंद्र सरकार एक सरल नियम को लागू करके देखे। अगर वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं है, तो लोगों को फ्यूल नहीं दिया जाएगा।
प्रस्तावित पायलट प्रोजेक्ट के तहत, पेट्रोल पंप फ्यूल देने से पहले व्हीकल के इंश्योरेंस की स्थिति की जांच करेंगे। जिन व्हीकल के पास वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं होगी, उन्हें तब तक फ्यूल देने से मना किया जा सकता है जब तक कि कवर रिन्यू ना हो जाए। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सैद्धांतिक रूप से इस प्रस्ताव पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।
सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI से कुछ जरूरी निर्देश भी जारी करने को कहा जिसमें नई कारों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की वैलिडिटी 3 साल से बढ़ाकर 4 साल और नए टू-व्हीलर के लिए 5 साल से बढ़ाकर 6 साल की जाए। अदालत ने कहा, “इसका मकसद सिर्फ सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों को मुआवजा दिलाना ही नहीं है, बल्कि यह भी है कि उन्हें लंबे समय तक चलने वाले कानूनी विवादों में ना पड़ना पड़े।”
इंश्योरेंस के जुड़े आंकड़ों को समझें
> सुप्रीम कोर्ट द्वारा बताए गए भारत में कुल रजिस्टर्ड व्हीकल 30.48 करोड़
> बिना वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाले अनुमानित व्हीकल 16.54 करोड़
> बिना इंश्योरेंस वाले रजिस्टर्ड व्हीकल का हिस्सा 56%
> अदालत द्वारा बताए गए सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बिना इंश्योरेंस वाले व्हीकल से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं का हिस्सा 22%
> नई कारों के लिए अब अनिवार्य न्यूनतम थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कवर 4 साल
> नए टू-व्हीलर्स के लिए अब अनिवार्य न्यूनतम थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कवर 6 साल
इंश्योरोंस पेट्रोल पंप पर कैसे काम कर सकेगा
फ्यूल स्टेशनों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाना ताकि व्हीकल का रजिस्ट्रेशन नंबर कैप्चर किया जा सके। इस नंबर को VAHAN व्हीकल डेटाबेस और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के रिकॉर्ड से क्रॉस-चेक किया जाएगा ताकि यह पता चल सके कि गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वैलिड है या नहीं। जिन गाड़ियों की पॉलिसी वैलिड नहीं होगी, उन्हें इंश्योरेंस रिन्यू होने तक फ्यूल देने से मना किया जा सकता है। यही सिस्टम बिना रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ियों की पहचान भी कर सकता है और इंश्योरेंस नियमों के उल्लंघन के लिए अपने-आप ई-चालान जारी कर सकता है।
मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 की धारा 146 के तहत थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस जरूरी है, ताकि सड़क दुर्घटना में घायल लोगों या मारे गए लोगों के परिवारों को समय पर मुआवजा मिल सके। भारत में रजिस्टर्ड आधी से ज्यादा गाड़ियों के बिना इंश्योरेंस होने का अनुमान है। इसलिए पीड़ितों को अक्सर जिम्मेदारी और मुआवजे को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टेक्नोलॉजी-बेस्ड एनफोर्समेंट, जिसमें फ्यूल की खरीद को इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ना शामिल है। नियमों का पालन बेहतर बना सकता है और दुर्घटना पीड़ितों को मुआवजा देने में होने वाली देरी को कम कर सकता है।
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस क्या है?
थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस कानूनी और आर्थिक जिम्मेदारी को कवर करता हैय़ अगर आपकी गाड़ी से किसी और को चोट लगती है, मौत होती है या संपत्ति का नुकसान होता है। इस स्थिति में थर्ड पार्टी प्रभावित व्यक्ति होता है, जबकि आप और इंश्योरेंस कंपनी पहली और दूसरी पार्टी होते हैं। यह आपकी अपनी गाड़ी को हुए नुकसान के लिए पेमेंट नहीं करता है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी कार किसी अन्य व्हीकल से टकरा जाती है, तो पॉलिसी दूसरे व्हीकल के नुकसान को कवर कर सकती है, लेकिन आपकी कार की मरम्मत के लिए आपको स्वयं के नुकसान या व्यापक बीमा की आवश्यकता होगी।
कोर्ट ने और क्या आदेश दिए
>> बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों का पता लगाने के लिए चुनिंदा राज्यों में ANPR-बेस्ड इंश्योरेंस एनफोर्समेंट पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएं।
>> राज्य की ट्रैफिक पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल ऐप दिए जाएं जो VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो से जुड़े हों, ताकि रियल टाइम में इंश्योरेंस स्टेटस की जांच की जा सके।
>> इंश्योरेंस और गाड़ी के रजिस्ट्रेशन डेटाबेस से जुड़े ANPR कैमरों के जरिए बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों के लिए ऑटोमैटिक ई-चालान जारी किए जाएं।
>> IRDAI प्राइवेट गाड़ी ओनर्स के लिए बेसिक मिनिमम थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ-साथ ऑप्शनल ऐड-ऑन, पर्सनल एक्सीडेंट और ओन-डैमेज कवर भी पेश करे।
इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि पूरे देश में बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को तुरंत फ्यूल देने से मना कर दिया जाएगा। यह प्रस्ताव अभी पायलट स्टेज पर है। पूरे देश में लागू करने से पहले, केंद्र और IRDAI को यह तय करना होगा कि पेट्रोल पंप इंश्योरेंस रिकॉर्ड तक कैसे पहुंचेंगे और उनकी जांच कैसे करेंगे। साथ ही, सिस्टम के काम करने की प्रैक्टिलिटी जैसे डेटाबेस में गड़बड़ी, कनेक्टिविटी की समस्या और हाल ही में रिन्यू की गई पॉलिसी की जांच करनी होगी।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.