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पीएम मोदी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लिखे पत्र में कहा कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति और असम्मान के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए. संसदीय मर्यादा का सम्मान लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है.
पीएम मोदी ने ओम बिरला को लिखा कि लोकतंत्र में संवाद और बहस की अहमियत है. (फाइल फोटो)
1. अविश्वास प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया
• प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकसभा में आपके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सदन में पराजित हुआ, जिससे स्पष्ट है कि सदन ने इस राजनीतिक कदम को अस्वीकार कर दिया।
2. संसदीय परंपराओं की सराहना
• अविश्वास प्रस्ताव के बाद आपने जो वक्तव्य दिया, उसमें संसदीय इतिहास, अध्यक्ष के दायित्व और नियमों की सर्वोच्चता का जिस संतुलन और स्पष्टता से उल्लेख किया, वह अत्यंत प्रभावशाली था।
3. लोकतंत्र में संवाद और बहस की अहमियत
• संसद का मूल स्वभाव संवाद, तर्क और विचार-विमर्श है। सदन में उठने वाली हर आवाज़ देश के करोड़ों नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करती है।
4. असहमति और असम्मान में फर्क
• लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन असहमति और असम्मान के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। संसदीय मर्यादा का सम्मान लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है।
5. अध्यक्ष की भूमिका और निष्पक्षता
• प्रधानमंत्री ने कहा कि आपने कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, संतुलन और निष्पक्षता के साथ सदन का संचालन किया, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा मजबूत हुई।
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राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
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