CBI को जांच के दौरान एक ऐसा WhatsApp मैसेज मिला, जो पहली नजर में सामान्य था। एक पैरेंट ने केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी से उनका पता पूछा था और उन्हें घड़ी गिफ्ट करने की बात कही थी।
एक WhatsApp मैसेज ने दिलाया पहला सुराग
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक CBI को जांच के दौरान एक ऐसा WhatsApp मैसेज मिला, जो पहली नजर में सामान्य था। एक पैरेंट ने केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी से उनका पता पूछा था और उन्हें घड़ी गिफ्ट करने की बात कही थी। जांच एजेंसी को यह संदेश संदिग्ध लगा और इसके बाद कुलकर्णी से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की गई।
MyGate ऐप से भी खुलासा
जांच के दौरान CBI ने आवासीय सोसाइटियों में इस्तेमाल होने वाले MyGate ऐप के लॉग्स खंगाले। इन रिकॉर्ड्स से पता चला कि कुछ छात्र कुलकर्णी के अपार्टमेंट में मौजूद थे। एजेंसी ने MyGate के डेटा की तुलना मोबाइल फोन के लोकेशन लॉग्स से की और दोनों में समानता पाई गई। इससे छात्रों की संबंधित स्थान पर मौजूदगी की पुष्टि करने में मदद मिली।
फीफा वर्ल्ड कप नाम के ग्रुप से भी खुलासा
इसके अलावा CBI ने ‘फीफा वर्ल्ड कप’ नाम के WhatsApp ग्रुप की गतिविधियों का भी विश्लेषण किया। इन डिजिटल सुरागों के जरिए एजेंसी कथित तौर पर उन छात्रों तक पहुंची, जिन्होंने लीक हुआ प्रश्नपत्र खरीदा था और आगे इस नेटवर्क की कड़ियां प्रश्नपत्र तैयार करने वाले आरोपियों तक जोड़ी गईं।
NTA के केमिस्ट्री एक्सपर्ट पर पेपर लीक का आरोप
CBI की चार्जशीट के अनुसार, कुलकर्णी को NEET-UG के लिए NTA ने केमिस्ट्री विषय के एक्सपर्ट के तौर पर नियुक्त किया था। एजेंसी के मुताबिक, प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी होने के बावजूद कुलकर्णी ने कथित तौर पर पैसे के बदले छात्रों को परीक्षा के सवाल उपलब्ध कराए। CBI का आरोप है कि कुलकर्णी ने परीक्षा से ठीक पहले अपने अपार्टमेंट में ‘स्पेशल क्लास’ आयोजित की, जिसमें छात्रों को कथित तौर पर लीक हुए सवाल बताए गए। इसके बदले छात्रों के अभिभावकों से पैसे लिए गए।जांच एजेंसी के अनुसार, कुलकर्णी ने 25 अप्रैल को ‘स्पेशल क्लास’ नाम से एक WhatsApp ग्रुप भी बनाया था। पैसे सीधे उनके पास या सह-आरोपी मनीषा वाघमारे के जरिए पहुंचाए जाते थे।
सवाल याद कर होटल में लिखे जाते थे
CBI के मुताबिक, कुलकर्णी और अन्य प्रश्नपत्र तैयार करने वाले आरोपियों ने NTA कार्यालय में तैयार किए जा रहे सवालों को कथित तौर पर याद किया या किसी किताब में चिन्हित किया। इसके बाद वे होटल में जाकर उन सवालों को लिखते थे और दूसरे आरोपियों तक पहुंचाते थे।
जांच में मिले हस्तलिखित नोट्स में दर्ज सवाल कथित तौर पर लीक हुए NEET-UG प्रश्नपत्रों से मेल खाते थे। कुलकर्णी के जब्त मोबाइल फोन से भी जांच एजेंसी को महत्वपूर्ण सामग्री मिली। फोन में परीक्षा से पहले कथित तौर पर प्रसारित हो रहे प्रश्नपत्र, उम्मीदवारों और अभिभावकों के संपर्क और सह-आरोपियों से बातचीत से जुड़ी जानकारी मिली। CBI के अनुसार, फोन में केमिस्ट्री प्रश्नपत्र की नौ तस्वीरें और उत्तर पर्चियां भी मिलीं, जो NEET-UG के प्रश्नपत्रों से मेल खाती थीं।
फिजिक्स का पेपर भी लीक करने का आरोप
चार्जशीट के मुताबिक, कुलकर्णी ने छात्रों के लिए फिजिक्स का प्रश्नपत्र हासिल करने की भी कोशिश की थी। हालांकि, फिजिक्स का पेपर कथित तौर पर मनीषा हवलदार के जरिए लीक हुआ। हवलदार NTA के उस पैनल में शामिल थीं, जिसे फिजिक्स का प्रश्नपत्र तैयार करने के साथ-साथ अंग्रेजी से मराठी और मराठी से अंग्रेजी में प्रश्नपत्र का अनुवाद करने की जिम्मेदारी दी गई थी। CBI का आरोप है कि गोपनीयता की शपथ लेने के बावजूद हवलदार ने एक अन्य आरोपी के कहने पर 25 हजार रुपये के बदले फिजिक्स के सवाल एक उम्मीदवार की मां को उपलब्ध कराए।
परीक्षा से आठ दिन पहले फोन में थे लीक सवाल
CBI के मुताबिक, परीक्षा से करीब आठ दिन पहले हवलदार के फोन में कथित लीक प्रश्नपत्र के हस्तलिखित नोट्स मौजूद थे। उन्होंने ये सवाल आरोपी तेजस शाह को बोलकर बताए थे।
राजस्थान तक पहुंचा था लीक प्रश्नपत्र
CBI की चार्जशीट के मुताबिक, पेपर लीक की कड़ियां राजस्थान तक भी पहुंची थीं। परीक्षा से चार दिन पहले 11 सेट कथित लीक प्रश्नपत्र एक काली Hyundai Verna कार से झुंझुनूं ले जाए गए थे। चार्जशीट में बताया गया है कि सीकर स्थित बीवाल परिवार के मंगीलाल बीवाल और दिनेश बीवाल के पास परीक्षा के पूरे सिलेबस से संबंधित प्रिंटेड सामग्री थी। इसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी तीनों विषयों की सामग्री शामिल थी।
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