यह कहानी है ओडिशा के कंधमाल जिले के डारिंगबाड़ी ब्लॉक के एक दूरदराज गांव में जर्जर से घर में रहने वाले 73 साल के बुरसी प्रधान और उनकी 62 साल की पत्नी अनुसूया के बच्चों की। आज उनके घर में जश्न का माहौल है।
बुरसी प्रधान के बच्चों की कहानी
यह कहानी है ओडिशा के कंधमाल जिले के डारिंगबाड़ी ब्लॉक के एक दूरदराज गांव में जर्जर से घर में रहने वाले 73 साल के बुरसी प्रधान और उनकी 62 साल की पत्नी अनुसूया के बच्चों की। आज उनके घर में जश्न का माहौल है। उनके परिवार के चार बच्चे और एक भतीजी अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। बुरसी प्रधान एक दिहाड़ी मजदूर हैं। अपनी मजदूरी से उन्होंने ने ना सिर्फ बच्चों का पेट पालने काम किया, बल्कि उनके पढ़ाई-लिखाई में कोई कमी नहीं आने दी।
बड़े बटे से हुई एमबीबीएस की शुरुआत
बुरसी प्रधान मजदूरी करने के लिए दूसरे शहर और राज्यों का भी सफर तय करना पड़ा था। उन्होंने केरल में भी मजदूर की। लेकिन स्वास्थ्य खराब होने के कारण उन्हें घर वापस आना पड़ा। बता दें कि बुरसी प्रधान के परिवार में डॉक्टर बनने की शुरुआत उनके बड़े बेटे बिभीषण प्रधान ने की। साल 2021 में उन्होंने नीट की परीक्षा क्रैक करने के बाद कोरापुट के श्री लक्ष्मण नायक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस में दाखिला लिया। इसके बाद उनकी बहन मोनलिसा को भी इसी मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिला।
इस साल बेटे और भतीजी ने पास की NEET परीक्षा
इस साल बुरसी प्रधान के परिवार की खुशियां और भी बढ़ गईं। उनके बेटे असारिया प्रधान ने भवानीपटना के शहीद रिंडो माझी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस में दाखिला हासिल किया, जबकि उनकी बेटी सुनेमी प्रधान ने बलांगीर के भीम भोई मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस की सीट पक्की की। परिवार की सफलता यहीं नहीं रुकी। बुरसी के छोटे भाई की बेटी मीनाक्षी प्रधान ने भी इस साल NEET परीक्षा पास की। मीनाक्षी अपने चाचा बुरसी के परिवार के साथ ही रहती हैं और अब पुरी के श्री जगन्नाथ मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एमबीबीएस की पढ़ाई करेंगी।
पढ़ाई को दी प्राथमिकताएं
सात बच्चों के पिता बुरसी प्रधान के लिए यह उपलब्धि सिर्फ परिवार में पांच मेडिकल सीटें हासिल होने की कहानी नहीं है। यह उन वर्षों की मेहनत, त्याग और संघर्ष का परिणाम है, जब आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी।
दूसरी पास हैं पिता बुरसी प्रधान
बता दें कि बच्चों के पिता बुरसी ने खुद सिर्फ कक्षा 2 तक पढ़ाई की है, लेकिन वह शिक्षा की अहमियत को अच्छी तरह समझते थे। इसलिए उन्होंने पूरी जिंदगी मेहनत की, ताकि उनके बच्चों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए। वहीं, बुरसी परिवार के पास मौजूद थोड़ी सी जमीन पर धान, अदरक और हल्दी की खेती करते हैं। कई बार बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे जुटाने के लिए उन्हें दूसरे राज्यों में जाकर मजदूरी भी करनी पड़ती है।
सरकार से की आर्थिक मदद की मांग
वहीं, इस साल MBBS में दाखिला लेने वाली सुनेमी प्रधान कहती हैं कि हमने बचपन में ही समझ लिया था कि गरीबी क्या होती है। अपने माता-पिता की आर्थिक स्थिति को देखते हुए हम अपनी जरूरतों को सीमित रखने की कोशिश करते हैं। वहीं, बुरसी के भाई जिशिया प्रधान ने राज्य सरकार से परिवार की आर्थिक मदद करने की अपील की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई का बोझ कुछ कम हो सके। उन्होंने कहा, “हमारे बच्चे डॉक्टर बनकर इलाके के लोगों की सेवा करेंगे। पूरे गांव को उन पर गर्व है।” गांव से आगे बढ़कर अपने सपनों को पूरा करने की तैयारी कर रहे ये बच्चे आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। वे अपने पिता के साथ खेत में काम करने के अलावा परिवार के जानवरों की देखभाल में भी हाथ बंटाते हैं।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.