सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को याचिका दाखिल कर NBEMS द्वारा करीब ढाई हजार उन छात्रों के लिए दोबारा से नीट-पीजी-2026 आयोजित करने को चुनौती दी गई जो परीक्षा नहीं दे पाए थे।
सुप्रीम कोर्ट में दोबारा नीट-पीजी कराने के खिलाफ याचिका
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक नई याचिका में एनबीईएमएस द्वारा करीब ढाई हजार (2,500) उन छात्रों के लिए फिर से नीट-पीजी 2026 आयोजित करने के निर्णय को चुनौती दी गई है, जो विभिन्न कारणों से मुख्य परीक्षा नहीं दे पाए थे।
याचिकाकर्ता की मुख्य दलील: याचिका में कहा गया है कि कुछ चुनिंदा छात्रों के लिए अलग से दोबारा परीक्षा आयोजित करना सुप्रीम कोर्ट के पूर्व में दिए गए कई ऐतिहासिक फैसलों और परीक्षा की निष्पक्षता के नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
अदालत की प्रतिक्रिया: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष जब इस मामले पर तत्काल सुनवाई का आग्रह किया गया, तो पीठ ने स्पष्ट किया कि नीट से जुड़े सभी मुख्य मामलों की सुनवाई पहले से ही जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। इसलिए इस नई याचिका का उल्लेख भी उसी पीठ के समक्ष करने के निर्देश दिए गए।
नीट-यूजी पेपर लीक मामले में आरोपी धनंजय लोखंडे की अर्जी खारिज
उधर, दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष सीबीआई अदालत में नीट-यूजी पेपर लीक मामले से जुड़ी सुनवाई के दौरान बड़ा आदेश आया।
क्या थी आरोपी की मांग?
मामले में आरोपी धनंजय लोखंडे ने अदालत में एक अर्जी दाखिल कर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को यह निर्देश देने की मांग की थी कि वह सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) को भेजी गई सामग्री और उससे जुड़ी विस्तृत जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करे।
अदालत का फैसला: सीबीआई के वकीलों और आरोपी के पक्ष की दलीलें व आपत्तियां सुनने के बाद विशेष सीबीआई जज ने लोखंडे की इस अर्जी को पूरी तरह से खारिज कर दिया। अदालत के इस सख्त रुख से पेपर लीक मामले की जांच कर रही सीबीआई की स्थिति को और मजबूती मिली है।
नीट यूजी व नीट पीजी परीक्षाओं से जुड़ी इन दोनों अदालती कार्रवाइयों पर देश भर के अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हुई हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई से नीट-पीजी के दोबारा आयोजन पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।
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