भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) की चयन समिति के अध्यक्ष आदिल सुमारीवाला ने कहा है कि नीरज चोपड़ा भारत के लिए हमेशा गोल्ड मेडल नहीं जीत सकेंगे। कभी-कभी सिल्वर मेडल से भी संतोष करना पड़ेगा। हमेशा गोल्ड लाना नामुमकिन है। उन्होंने और भी बातें कहीं।
नीरज चोपड़ा ने दिखाई है निरंतरता, हर बार गोल्ड जीतना असंभव
दो बार के ओलंपिक पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी और पिछले लगभग एक साल से पीठ के निचले हिस्से में दर्द से परेशान रहे 28 वर्षीय चोपड़ा ने पिछले महीने ग्लास्गो में राष्ट्रमंडल खेलों में 86.48 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक जीता था। उन्होंने 2018 में इसी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया था। वह 2022 में राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं ले पाए थे। सुमारीवाला ने कहा कि 2016 में 86.48 मीटर का जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद से वैश्विक मंच पर चोपड़ा ने अपने प्रदर्शन में जिस तरह की निरंतरता दिखाई है उसके लिए उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए। सुमारीवाला ने पीटीआई से कहा, ”चोट से उबरने के बाद वापसी करते हुए रजत पदक जीतना शानदार प्रदर्शन है। हमें पूरा भरोसा है कि आने वाले दिनों में उनका प्रदर्शन और बेहतर होगा।” उन्होंने कहा, ”ऐसा नहीं है कि वह हमेशा स्वर्ण पदक ही जीतेंगे। ऐसा होना नामुमकिन है। रजत पदक भी मिलते हैं। वह भी इंसान हैं। हमें इस चर्चा को यहीं खत्म कर देना चाहिए। हमें उनके रजत पदकों का भी जश्न मनाना चाहिए।”
राष्ट्रीय भाला फेक दिवस है आज, नीरज ने जीता था सोना
भारतीय एथलेटिक्स महासंघ सात अगस्त को राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस के रूप में मनाता है क्योंकि चोपड़ा ने 2021 में तोक्यो ओलंपिक खेलों में इसी दिन स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था।चोपड़ा को पिछले साल सितंबर में विश्व चैंपियनशिप से दो सप्ताह पहले पीठ के निचले हिस्से में चोट लग गई थी। उन्होंने इस साल जून में दोहा डायमंड लीग में वापसी की, जहां वह चौथे स्थान पर रहे।वह अब 21 अगस्त को लुसाने डायमंड लीग में और चार और पांच सितंबर को ब्रुसेल्स में डायमंड लीग फाइनल में हिस्सा लेंगे। इसके बाद सितंबर अक्टूबर में एशियाई खेलों में भी सभी की निगाह उन पर टिकी रहेगी। पिछले एक साल से उनकी फिटनेस चर्चा का विषय बनी हुई है। माना जा रहा है कि चोट के कारण चोपड़ा अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में वापसी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुमारीवाला ने कहा कि चोपड़ा की प्रतिबद्धता पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए।
जो भी पदक जीते हैं बोनस के रूप में लेना चाहिए
उन्होंने कहा, ”आपको दो ओलंपिक पदक, एक स्वर्ण और एक रजत, किसने दिए हैं। आपको विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण, जूनियर विश्व रिकॉर्ड और एक स्वर्ण पदक किसने दिया है। आपको एशियाई खेलों में स्वर्ण, राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और रजत तथा एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक किसने दिया है। उन्होंने जो भी पदक जीता है, हमें उसे बोनस के रूप में लेना चाहिए।” सुमारीवाला ने कहा, ”इसलिए जब वह रजत पदक भी जीत लें तो हमें उस पर अगर मगर नहीं कर नहीं चाहिए। उन्हें जो भी करना होगा, वह करेंगे और वह यह जानते हैं। वह भारत के अब तक के महानतम एथलीट हैं।” इस बीच सुमारीवाला ने सेबेस्टियन को के उत्तराधिकारी के रूप में विश्व एथलेटिक्स के अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। चुनाव अगले साल सितंबर में होंगे। उन्होंने कहा, ”मैं विश्व एथलेटिक्स परिषद के सदस्य के रूप में दो कार्यकाल और उपाध्यक्ष के रूप में एक कार्यकाल पूरा कर चुका हूं। मेरे पास सभी योग्यताएं हैं, चाहे वह शैक्षणिक हों या अनुभव। मुझे लगता है कि मैं इस पद के लिए पूरी तरह से योग्य हूं। मैंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।”
(फिलेम दीपक सिंह)
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