ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी यशवीर सिंह ने एक अद्भुत कारनामा कर दिखाया। मुकाबले के अंतिम दौर से ठीक पहले यशवीर 81.33 मीटर के थ्रो के साथ सातवें स्थान पर चल रहे थे और मेडल जीतने की रेस से लगभग बाहर हो चुके थे। उसी समय ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा ने उन्हें एक बहुत ही साधारण लेकिन असरदार सलाह दी। नीरज ने यशवीर से कहा कि वे भाले को फेंकते समय एक सीधी लाइन में रखें। यशवीर ने इस सलाह पर अमल किया और अपने आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर का शानदार थ्रो फेंककर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम कर लिया।
यशवीर सिंह को आखिरी थ्रो से पहले नीरज चोपड़ा ने दी थी सलाह
जैवलिन फेंकते समय उसे सही दिशा और सीध में रखना बहुत जरूरी होता है। इससे भाला दूर तक जाता है और फेंकने वाले के कंधे या हाथ पर ज्यादा जोर भी नहीं पड़ता। न्यूज एजेंसी PTI के हवाले से यशवीर ने बताया कि नीरज चोपड़ा की सलाह मानकर उन्होंने भाले को कान के पास सही से पकड़ा, अपने कंधों को सामने की तरफ सीधा रखा, हाथ को पीछे खींचकर उसी लाइन में ऊपर से भाला फेंका। नीरज की इस छोटी सी सलाह ने यशवीर के थ्रो में बड़ा बदलाव ला दिया और अंत में वह मेडल जीतने में भी कामयाब रहे।
इस कॉमनवेल्थ गेम्स में मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं था- यशवीर सिंह
कॉमनवेल्थ गेम्स से दिल्ली लौटने के बाद यशवीर सिंह ने बताया कि इस बड़े टूर्नामेंट में उन पर कोई दबाव नहीं था। सभी फैंस और मीडिया का ध्यान नीरज चोपड़ा, अरशद नदीम, रुमेश पथिरागे और एंडरसन पीटर्स जैसे बड़े खिलाड़ियों पर टिका हुआ था। इसका फायदा उठाते हुए यशवीर ने बिना किसी मानसिक तनाव के सिर्फ अपने खेल पर ध्यान दिया। वे खुद से बार-बार यही कहते रहे कि उन्हें अपना 100 प्रतिशत देना है और अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड बनाना है।
जैवलिन थ्रो में इस बार किसने जीता गोल्ड मेडल?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में जैवलिन थ्रो में श्रीलंका के पूर्व क्रिकेटर और एथलीट रूमेश थरंगा पथिरागे ने कमाल किया, उन्होंने 89.75 मीटर थ्रो के साथ गोल्ड मेडल को अपने नाम किया। नीरज चोपड़ा ने 85.83 मीटर का थ्रो करके सिल्वर मेडल जीता। वहीं साल 2024 के पेरिस ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले अरशद नदीम तीसरा राउंड खत्म होने के साथ ही बाहर हो गए। अरशद नदीम ने मेडल इवेंट में अपना सबसे अच्छा थ्रो दूसरे राउंड में फेंका था जो 77.41 मीटर का था, लेकिन इसके बावजूद वह टॉप-8 में अपनी जगह बनाने में कामयाब नहीं हो सके।
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