अडानी एंटरप्राइजेस ने ₹14,535 करोड़ की बोली के साथ कर्ज में डूबी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स (JAL) को खरीदने की कानूनी जंग जीत ली है। NCLAT ने वेदांता लिमिटेड की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें दावा किया गया था कि उनकी बोली अडानी से ₹3,400 करोड़ ज्यादा है।
क्या था पूरा मामला?
NCLAT ने क्यों सुनाया यह फैसला?
ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने स्पष्ट किया है कि किसी भी कंपनी को केवल इसलिए विजेता नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि उसकी बोली की राशि सबसे ज्यादा है। इस पर कोर्ट ने निम्नलिखित तर्क दिए हैं।
1- व्यावसायिक समझ :- बैंक और लेनदार केवल पैसा नहीं देखते, बल्कि यह भी देखते हैं कि कौन सी कंपनी योजना को बेहतर ढंग से लागू कर सकती है और किसके पास काम पूरा करने की क्षमता है।
2- लेनदारों का भरोसा:- अडानी की योजना को 89% लेनदारों का समर्थन प्राप्त था।
3- प्रक्रिया में पारदर्शिता:- अदालत ने पाया कि दिवालिया प्रक्रिया के नियमों (IBC) का पूरी तरह पालन किया गया है और इसमें कोई अनियमितता नहीं थी।
अडानी को क्या-क्या मिलेगा?
जेपी एसोसिएट्स का साम्राज्य काफी फैला हुआ है। इस अधिग्रहण के जरिए अडानी ग्रुप के पास ये महत्वपूर्ण संपत्तियां आएंगी।
1- रियल एस्टेट:- ग्रेटर नोएडा का जेपी ग्रीन्स और नोएडा का विशटाउन।
2-इंफ्रास्ट्रक्चर:- जेवर एयरपोर्ट के पास इंटरनेशनल स्पोर्ट सिटी और यमुना एक्सप्रेसवे का टोलिंग अधिकार।
3-सीमेंट और पावर:- मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थित बड़े सीमेंट प्लांट और पावर सेक्टर में निवेश।
यह फैसला कॉर्पोरेट जगत के लिए एक बड़ा सबक है कि दिवालियापन और दिवालिया संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code- IBC) के तहत केवल ‘सबसे ऊंची बोली’ मायने नहीं रखती, बल्कि कंपनी की विश्वसनीयता, तुरंत भुगतान (Upfront Payment) और काम करने की काबिलियत भी उतनी ही जरूरी है। अडानी ग्रुप के लिए यह एक रणनीतिक जीत है, जो उन्हें इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट सेक्टर में और अधिक मजबूती प्रदान करेगी।
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