लद्दाख में बना देश का सबसे ऊंचा फूल का खेत, 50 हजार से ज्यादा लिलियम बल्ब लगाए, सितंबर से दिखेगा खूबसूरत नजारा
Published : Jul 16, 2026 05:45 pm IST, Updated : Jul 16, 2026 05:45 pm IST
1/8
Image Source : Reporter Input
लद्दाख के लेह स्थित चोगलामसर में भारत के सबसे ऊंचे व्यावसायिक लिलियम फूलों के खेत का विकास कार्य शुरू हो गया है। यह लद्दाख में अपनी तरह की पहली बड़े पैमाने की पुष्पोत्पादन (फ्लोरीकल्चर) परियोजना है, जिसका उद्देश्य फूलों की व्यावसायिक खेती के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए नए रोजगार और आय के अवसर पैदा करना है। पिछले तीन दिनों में इस फ्लावर फील्ड में 50 हजार से अधिक प्रीमियम लिलियम बल्ब लगाए जा चुके हैं। इन पौधों में पहली बार फूल इस वर्ष सितंबर के पहले सप्ताह तक खिलने की उम्मीद है।
2/8
Image Source : Reporter Input
करीब 93,000 वर्गमीटर क्षेत्र में फैला यह चोगलामसर फ्लावर फील्ड सिंधु नदी के किनारे विकसित किया जा रहा है। इसे देश के सबसे बड़े संगठित उच्च हिमालयी फ्लोरीकल्चर पार्कों में से एक बनाया जा रहा है। वर्तमान में भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित फूलों का खेत उत्तराखंड के माना गांव में 3,200 मीटर की ऊंचाई पर है, जबकि चोगलामसर फ्लावर पार्क लगभग 3,265 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जो इसे देश का सबसे ऊंचा व्यावसायिक फूलों का खेत बनाता है।
3/8
Image Source : Reporter Input
इस परियोजना को सीएसआईआर-हिमालयन बायोरिसोर्स टेक्नोलॉजी संस्थान, पालमपुर का वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग प्राप्त है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 22 जून 2026 को इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। इस परियोजना का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले लिलियम फूल और कलियां तैयार करना है, जिनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छी कीमत मिलती है। इससे स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों के माध्यम से लद्दाख के किसानों के लिए आय का एक नया और स्थायी स्रोत विकसित होगा।
4/8
Image Source : Reporter Input
यह पहल केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के “सहकार से समृद्धि” के विजन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सहकारी संस्थाओं को मजबूत बनाकर स्थानीय स्तर पर टिकाऊ रोजगार सृजित करना तथा विशेष रूप से महिलाओं और किसानों की आय बढ़ाना है। उप राज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की परिकल्पना पर आधारित इस परियोजना का लक्ष्य लद्दाख को प्रीमियम फ्लोरीकल्चर के उभरते केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जिससे यहां के उत्पादों को देश और विदेश के उच्च मूल्य वाले फूलों के बाजारों तक पहुंच मिल सके। साथ ही यह फ्लावर फील्ड पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण भी बनेगा।
5/8
Image Source : Reporter Input
परियोजना के तहत पहले वर्ष कृषि विभाग इस फ्लावर फील्ड का विकास करेगा। फूल खिलने के बाद इसे चयनित स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों को सौंप दिया जाएगा। विभाग इन समूहों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फूलों की बिक्री और विपणन में सहयोग देगा ताकि उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके। अगले वर्ष से सहकारी समितियां स्वयं लिलियम की व्यावसायिक खेती, कटाई और मूल्य संवर्धन का कार्य करेंगी। इसके लिए स्थानीय किसानों को वैज्ञानिक फ्लोरीकल्चर, आधुनिक खेती तकनीकों और व्यावसायिक फूल उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।लद्दाख की जलवायु लिलियम की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है।
6/8
Image Source : Reporter Input
यह पौधा माइनस 4 डिग्री से 4 डिग्री सेल्सियस के बीच के ठंडे मौसम में सबसे बेहतर विकसित होता है, जिससे यह क्षेत्र इसकी खेती के लिए प्राकृतिक रूप से उपयुक्त है। इसकी एक बड़ी विशेषता यह है कि तीन वर्षों के भीतर इसके बल्ब स्वतः बढ़ने लगते हैं, जिससे बिना अतिरिक्त निवेश के भविष्य में उत्पादन और किसानों की आय दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
7/8
Image Source : Reporter Input
इस अवसर पर उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा, “लद्दाख की जलवायु को अक्सर चुनौती माना जाता है, लेकिन वास्तव में यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है। लिलियम की व्यावसायिक खेती शुरू कर हम किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए आय का एक नया रास्ता खोल रहे हैं। हमारा लक्ष्य लद्दाख को उच्च हिमालयी फ्लोरीकल्चर हब के रूप में विकसित करना है, जहां वैज्ञानिक खेती, मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार व्यवस्था के माध्यम से स्थानीय समुदायों को स्थायी आजीविका मिल सके। यह पहल कृषि में विविधता लाने के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और युवा उद्यमियों को भी सशक्त बनाएगी।”
8/8
Image Source : Reporter Input
लिलियम दुनिया के सबसे लोकप्रिय कट-फ्लावर (कटे हुए सजावटी फूल) में से एक है। इसकी सुंदरता और लंबी शेल्फ लाइफ के कारण फूल उद्योग और आतिथ्य क्षेत्र में इसकी काफी मांग रहती है। घरेलू खुदरा बाजार में इसकी प्रीमियम किस्मों की कीमत 150 से 200 रुपये प्रति स्टिक तक होती है।
function loadFacebookScript(){
!function (f, b, e, v, n, t, s) {
if (f.fbq)
return;
n = f.fbq = function () {
n.callMethod ? n.callMethod.apply(n, arguments) : n.queue.push(arguments);
};
if (!f._fbq)
f._fbq = n;
n.push = n;
n.loaded = !0;
n.version = ‘2.0’;
n.queue = [];
t = b.createElement(e);
t.async = !0;
t.src = v;
s = b.getElementsByTagName(e)[0];
s.parentNode.insertBefore(t, s);
}(window, document, ‘script’, ‘//connect.facebook.net/en_US/fbevents.js’);
fbq(‘init’, ‘1684841475119151’);
fbq(‘track’, “PageView”);
}