अगर आपसे दुनिया की खुफिया एजेंसियों के बारे में पूछा जाए तो सबसे पहले आप भारत की रॉ का नाम लेंगे। उसके बाद अमेरिका की सीआईए, इजराइल की मुसाद, पाकिस्तान की आईएसआई का नाम भी चर्चा में रहता है। आप में से कुछ लोग यह भी बता देंगे कि सोवियत यूनियन की हुविया एजेंसी केजीबी अब रूस की एफएसबी बन गई है। लेकिन चीन का नाम आते ही आप अटक जाएंगे। आपने शायद कभी ध्यान ही नहीं दिया होगा कि चीन की सीक्रेट एजेंसी का नाम क्या है? लोग आमतौर पर चीन की खुफिया एजेंसी के बारे में कभी बात ही नहीं करते। इसी वजह से चीन की खुफिया एजेंसी बेहद खतरनाक बन गई है। दरअसल चीन की खुफिया एजेंसी का नाम एमएसएस है। एमएसएस यानी मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी।
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पहली बार जानकारी सामने आई है कि चीन की मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी किस तरह से काम करती है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी के जरिए चीनी कम्युनिस्ट पार्टी विदेशों में घटने वाली घटनाओं की निगरानी और उन्हें प्रभावित करने के लिए गुप्त एजेंट्स के एक विश्वव्यापी नेटवर्क को संचालित करती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीनी खुफिया एजेंसी मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी का काम अब सिर्फ पारंपरिक खुफिया जानकारी जुटाना नहीं है बल्कि चीनी खुफिया एजेंसी तो इससे कहीं ज्यादा आगे निकल गई है। भारत समेत पश्चिमी देशों में चीन की खुफिया एजेंसियों ने कई क्षेत्रों में पकड़ बना ली है। चीनी एजेंट्स की टीम में अब टीचर्स, प्रोफेसर्स, बिजनेसमैन, सेलिब्रिटीज, पत्रकार, एनजीओस, एक्टिविस्ट और बुद्धिजीवी सब शामिल हो गए हैं। यह लोग चुपचाप चीन के लिए किसी भी देश में काम करते रहते हैं। चीन का एजेंडा फैलाते रहते हैं। चीनी खुफिया एजेंसी ने तो कई देशों की स्थानीय सरकारों में भी अपने लोगों को शामिल करवा दिया है। यह लोग सरकार में बैठकर चीन के पक्ष में नीतियां बनाते हैं। इन एजेंट्स के जरिए चीन खुफिया जानकारी जुटाने के साथ-साथ कई मुद्दों पर एजेंडा भी सेट करता है।
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बहरहाल अब सवाल है कि चीनी खुफिया एजेंसी मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी का सबसे पहला और बड़ा टारगेट कौन है? तो आपको बता दें कि चीनी खुफिया एजेंसी का सबसे बड़ा टारगेट चीनी लोग ही हैं जो विदेशों में रहते हैं। इसके बाद अमेरिका और भारत का नंबर आता है। विदेशों में रहने वाले लोगों पर चीन इसलिए नजर रखता है ताकि वह चीन की खुफिया जानकारी किसी और को ना दे दे। चीन कैसा देश है? वहां सरकार कैसे काम करती है? वहां के लोग क्या सोचते हैं? इसकी जानकारी दुनिया में किसी को नहीं होती। यहां तक कि चीनी लोग चीन में बने सोशल मीडिया ऐप ही यूज करते हैं।
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भारत के लिए खतरे वाली बात यह है कि चीन अब सिर्फ अपने एजेंट्स के जरिए ही जानकारियां नहीं जुटा रहा बल्कि चीन की कंपनियां भी भारत की जासूसी कर रही हैं। चीनी गैजेट्स लगातार भारतीय लोगों के बिहेवियर और चॉइसेस पर नजर रखते हैं। यह गैजेट्स जानकारी जुटाते हैं कि भारत के लोगों की पसंद क्या है और नापसंद क्या है। इसी के बाद लोगों का ब्रेन वाश शुरू किया जाता है। बहरहाल, चीन से बढ़ते जासूसी खतरों के बीच भारत सरकार ने इंटरनेट आधारित सीसीटीवी कैमरों के नियमों में एक बहुत बड़ा बदलाव कर दिया है।
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