नागपंचमी के मौके पर नाग देव की पूजा-आराधना की जाती है। वहीं देश के अलग-अलग हिस्सों में कई ऐसे मंदिर जो नागदेव को समर्पित हैं और नागपंचमी पर इन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। जानें ऐसे ही देश के 5 नाग देव के मंदिरों के बारे में, जहां दर्शन के लिए लोग जाते हैं।
नाग चंद्रेश्वर मंदिर
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर के ऊपरी हिस्से में बना है नाग चंद्रेश्वर मंदिर, जो साल में एक बार नाग पंचमी के मौके पर ही खुलता है। इस मंदिर में शिवलिंग के चारों तरफ नाग देव लपटे हुए हैं। दूर-दूर से लोग नागपंचमी के दिन इस मंदिर के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
मन्नारशाला नागराज टेंपल
केरल में सर्पदेव नागराज को समर्पित ये मंदिर बना है जो हरिपद के घने जंगलों के बीच है। इस मंदिर में सर्पदेव नागराज के साथ देवी नाग्याक्षी की पूजा की जाती है। जिन लोगों की कुंडली में काल सर्प दोष होता है वो इस मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां पर लगभग 30 हजार नाग की मूर्तियां मंदिर परिसर में बनी हुई है।
कुक्के सुब्रमण्यम मंदिर
दक्षिण कन्नड़ जिले के जंगल में कुक्के सुब्रमण्यम टेंपल बना है। इस मंदिर में भगवान सुब्रण्यम के साथ नाग वासुकि दोनों की पूजा होती है। इस मंदिर में लोग काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए आते हैं। नदी के किनारे, पहाड़ों से घिरा ये टेंपल खूबसूरती के मामले में भी खास है।
भुजंग नागराज टेंपल
गुजरात के भुज शहर के नजदीक भुज की पहाड़ी पर भुजंग नागराज का मंदिर है। जो एक सम्मानित नागा सरदार को समर्पित है। जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने हमलावरों से इस इलाके की रक्षा की थी। पौराणिक नजर से खास होने के साथ ही यह मंदिर भुज के शानदार नजारे दिखाता है और एक पॉपुलर ट्रेकिंग स्पॉट भी है।
नागवासुकि मंदिर
यूपी के प्रयागराज में नागवासुकि का मंदिर है। नागवासुकि ने समुद्र मंथन के बाद अपने घावों से राहत पाने के लिए भगवान विष्णु के कहने पर संगम तट पर शरण ली थी और यहीं पर वास करने लगे। इस मंदिर में नागपंचमी पर काफी भीड़ उमड़ती है वहीं मान्यता है कि संगम में स्नान के बाद इनके दर्शन किए जाते हैं।
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