आज डिमेंशिया, अल्जाइमर और अकेलापन बुजुर्गों की सबसे बड़ी चुनौतियां बन रही हैं। इनका इलाज भी आसान नहीं होता है, लेकिन डब्ल्यूएचओ से लेकर हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन सहित कई संस्थानों के शोध में पाया है कि इन बीमारियों के इलाज में संगीत “नॉन-ड्रग थैरेपी’ की तरह काम करता है। रोज 20 मिनट गाने सुनना दिमाग के लिए जिम में कसरत करने जैसा है। संगीत का विज्ञान – बढ़ती उम्र में लाभदायक वैज्ञानिकों के अनुसार जब कोई व्यक्ति संगीत सुनता है, तो यह दिमाग के सिर्फ सुनने वाले हिस्से को ही नहीं, बल्कि तीन अन्य भागों को भी फायदा पहुंचाता है। ये हिप्पोकैंपस यानी याददाश्त केंद्र, अमिग्डाला-भावनाओं का केंद्र व तीसरा प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स यानी निर्णय और सोच केंद्र को सक्रिय करता है। इसे डिमेंशिया का प्रभावी इलाज माना जाता है। बुजुर्गों के लिए इस तरह काम करता है म्यूजिक 1. समय और मात्रा रोजाना सुबह योग के साथ 20 से 30 मिनट का संगीत दिनभर की स्फूर्ति देता है। खाना खाने के वक्त 10 मिनट का सॉफ्ट म्यूजिक तनाव हार्मोंस कार्टीसोल को कम करता है। वहीं रात के वक्त 15 से 20 मिनट अपने पसंदीदा गाने सुनने से नींद बहुत अच्छी आती है। 2. बैलेंस बेहतर होता है गाने सुनने के साथ गुनगुनाने या संगीत की ताल पर पैर हिलाने या हाथों से ताली बजाने से बैलेंस बेहतर होता है और गिरने का खतरा घटता है। दिमाग भी सक्रिय रहता है। 3. याददाश्त बढ़ाता है पुराने गाने सुनने से दिमाग का वह हिस्सा सक्रिय रहता है, जो यादों को संभालकर रखता है। डिमेंशिया व अल्जाइमर के मरीजों में भी यह स्मृति जगाने में मदद करता है। 4. डिप्रेशन और अकेलेपन की दवा समूह में गाना गाने या पसंदीदा संगीत सुनने से खुशी का हार्मोन (डोपामाइन) बढ़ता है। इससे अकेलेपन की भावना काफी हद तक घटती है और उदासी दूर होती है।
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