चेन्नई के बल्लेबाजी कोच माइकल हसी ने पहले ही संकेत दिए थे कि धोनी नेट्स में अच्छी बल्लेबाजी कर रहे हैं, लेकिन असली चिंता उनकी रनिंग और विकेटकीपिंग पर बनी हुई थी। हेड कोच स्टीफेन फ्लेमिंग ने भी स्वीकार किया कि टीम धोनी की जल्दी वापसी की कोशिश कर रही थी, मगर वॉर्म‑अप मैच के दौरान उनकी तकलीफ वापस उभर आई और यही वजह रही कि उन्हें न खेलवाना उचित माना गया।
रविचंद्रन अश्विन के एक बयान ने फैला दी सनसनी
ऐसे समय में टीम इंडिया के पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के यूट्यूब बयान ने सबकी उम्मीदें बढ़ा दीं। अश्विन ने कहा कि वह मानते हैं कि धोनी के SRH के खिलाफ खेलने की “अच्छी संभावना” है और उन्होंने सुना है कि धोनी पिछले 2–3 मैचों से खेलने के लिए तैयार थे। अश्विन की इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर #DhoniReturn ट्रेंड करने लगा और चेन्नई के स्टैंड में खड़े फैन्स में अचानक उम्मीद की लहर दौड़ गई।
धोनी की वापसी की चर्चा को भावनात्मक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी मिलती है। 2021 में CSK की खिताबी जीत के बाद धोनी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “उम्मीद है मेरा आखिरी टी20 मैच चेन्नई में होगा।” अब लगभग पांच साल बाद चेन्नई में CSK का यह आखिरी लीग मैच हो रहा है और पूरा हिसाब‑किताब, फैन्स का प्यार और मीडिया फोकस सब कुछ मिलकर इस मुकाबले को संभावित फेयरवेल‑मोमेंट जैसा बना देते हैं, भले ही धोनी ने रिटायरमेंट पर कोई स्पष्ट घोषणा न की हो।
टैक्टिक और भूमिका की बात करें तो अगर धोनी मैदान में उतरते हैं तो CSK को उनकी भूमिका बहुत सोच‑समझ कर तय करनी होगी। चुनौतियां और विकल्प दोनों हैं:
विकेटकीपर‑बल्लेबाज के रूप में खेलना: यह पूरी तरह उनकी फिटनेस पर निर्भर करेगा, क्योंकि विकेटकीपिंग में लगातार झुकना और तेज रिएक्शन की आवश्यकता पड़ती है।
फिनिशर / ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ के रूप में इस्तेमाल: मैच की परिस्थिति देखकर सिर्फ तेज़ बल्लेबाजी और निर्णायक ओवरों में उतारना सुरक्षित विकल्प हो सकता है; इससे उनसे टीम को बैटिंग में अंतिम झटका मिलने की संभावना बनती है, बिना पूरी मैच‑ड्यूटी के बोझ के।
कप्तानी या रणनीति का इनपुट: भले ही वे मैदान में न खेले, धोनी का अनुभव और अंतिम ओवरों का निपुणता चेन्नई की रणनीति पर बड़ा असर डाल सकती है।
धोनी की मौजूदगी का मानसिक प्रभाव भी मायने रखता है। वे टीम के आत्मविश्वास और भीड़ के उत्साह को तुरंत बढ़ा देते हैं। चेपॉक में उनकी एंट्री स्टैंड्स में जश्न और दबाव दोनों बनाती है। CSK फिलहाल प्लेऑफ की रेस में जूझ रही है, इसलिए यह मैच सिर्फ भावनात्मक नहीं बल्कि परिणाम के लिहाज से भी ‘करो या मरो’ वाला बन सकता है। अगर धोनी खेलते हैं, तो चेपॉक का माहौल और खेल‑पिच दोनों पर असर पड़ेगा। विरोधी टीम पर दबाव का अतिरिक्त आयाम जुड़ जाएगा।
अभी तक CSK की ओर से धोनी की वापसी पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है; टीम ने मैच‑शेड्यूल और मेडिकल टीम की छानबीन के बाद अंतिम फैसला टॉस के समय या उससे पहले की प्रेस कॉन्फ्रेंस में देने का रुख अपनाया है। इसलिए हर किरदार कोच, मेडिकल स्टाफ, खिलाड़ी और खासकर फैन्स टॉस का इंतजार कर रहे हैं। टॉस ही तय करेगा कि क्या धोनी के लौटने के इस कयास को हकीकत का रंग मिल पाएगा या यह किस्से‑कहानियों में ही रह जाएगा।
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