मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कार्तिकेय सिंह चौहान के बीच चल रहे मानहानि मामले में सुनवाई पूरी हो गई। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। राहुल गांधी की ओर से दायर याचिका पर जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने
हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के हल्फनामे के बाद कार्तिकेय सिंह चौहान को जवाब पेश करने के लिए बुलाया था। कार्तिकेय की ओर से कोर्ट में कहा गया कि अगर राहुल गांधी ने कन्फ्यूजन में नाम लिया था, तो उन्हें अब इस पर कोई दिक्कत या आपत्ति नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। जल्द फैसला आ सकता है।
कार्तिकेय की ओर से याचिका खारिज करने की मांग
कार्तिकेय सिंह चौहान के वकील संकल्प कोचर ने कोर्ट में कहा- राहुल गांधी ने अपने लिखित जवाब में स्वीकार किया है कि उन्होंने भूलवश पनामा पेपर्स में लिया था। इस पर खेद भी व्यक्त किया है। उनका बयान न तो तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और न ही कार्तिकेय सिंह चौहान के संदर्भ में था।
वकील ने बताया कि कार्तिकेय सिंह चौहान ने भी अपने जवाब में कहा है कि उन्हें अब कोई आपत्ति नहीं है। मानहानि की कार्रवाई और राहुल गांधी की याचिका को समाप्त करते हुए मामले का निराकरण किया जाना चाहिए। मामले में हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। आदेश आज या फिर सोमवार तक आने की संभावना जताई जा रही है।
राहुल गांधी ने कहा था- पनामा पेपर्स में कार्तिकेय का नाम
चुनावी रैली में राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि पनामा पेपर्स लीक मामले में शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम शामिल है। पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ का नाम पनामा पेपर्स में आने पर उन्हें जेल हुई थी, लेकिन मध्य प्रदेश में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
राहुल गांधी बोले- कन्फ्यूजन में कार्तिकेय का नाम लिया
हाईकोर्ट में पेश आवेदन में राहुल गांधी ने कहा- उनका बयान शिकायतकर्ता के संबंध में नहीं था। भाषण के दौरान गलती से कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम आ गया था। विवादित बयान के अगले दिन राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे छत्तीसगढ़ के तत्कालीन CM रमन सिंह के बेटे अभिषेक का नाम लेना चाहते थे, लेकिन कन्फ्यूजन में कार्तिकेय का नाम ले लिया।
यह मामला 2018 के झाबुआ विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी के एक भाषण से जुड़ा है। कार्तिकेय सिंह चौहान का आरोप है कि कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए राहुल गांधी ने चुनावी सभा में पनामा पेपर्स लीक प्रकरण का जिक्र करते हुए उनका नाम लिया था। शिकायत के अनुसार इससे उनकी प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुंचा।

एमपी-एमएलए कोर्ट में दायर हुआ था परिवाद
कार्तिकेय सिंह चौहान ने भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद दायर किया था। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने पैरवी की। सुनवाई के बाद अदालत ने राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किए थे।
समन को हाईकोर्ट में दी चुनौती
एमपी-एमएलए कोर्ट से जारी समन और लंबित कार्यवाही को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया है। याचिका में निचली अदालत की कार्यवाही पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही 25 जून को होने वाली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की मांग भी की गई थी।

वह मामला जिसमें राहुल को माफी मांगनी पड़ी थी
(राफेल मामला-2019)- पीएम को ‘चौकीदार चोर है’ कहा था
क्या हुआ था?: राहुल गांधी ने राफेल मामले पर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी मान लिया है कि “चौकीदार चोर है”। भाजपा सांसद Meenakshi Lekhi ने अवमानना याचिका दायर की।
पहले क्या किया?: राहुल गांधी ने शुरू में खेद जताया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे पर्याप्त नहीं माना।
बाद में क्या किया?: उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र देकर बिना शर्त माफी मांगी और कहा कि कोर्ट को बयान से जोड़ना अनजाने में हुई गलती थी।
नतीजा: सुप्रीम कोर्ट ने माफी स्वीकार कर अवमानना मामला बंद कर दिया, हालांकि भविष्य में सावधानी बरतने की चेतावनी दी।
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राहुल गांधी बोले-कन्फ्यूजन में लिया था कार्तिकेय का नाम
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान के बीच चल रहे मानहानि केस की सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में हुई। राहुल ने लिखित आवेदन में अपने पुराने बयान पर खेद व्यक्त किया है। उन्होंने कहा- बयान कार्तिकेय के संदर्भ में नहीं था। उसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए। पूरी खबर पढ़ें
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