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मानसून जल्द ही केरल में दस्तक देने वाला है। लगभग 20 दिन बाद मध्य-उत्तर भारत में भी पहुंच जाएगा। अगर मानसून से पहले घर की देखभाल न करने पर छोटी दरारें, सीलन और लीकेज भी बड़ी समस्या बन सकती हैं। इसलिए घर की सुरक्षा के लिए समय रहते वाटरप्रूफिंग जरूरी है।
कुछ लोग मानते हैं कि नए घरों में वाटरप्रूफिंग की जरूरत नहीं होती। लेकिन एक्सपर्ट्स के अनुसार, इससे छत, दीवार और बेसमेंट सुरक्षित रहते हैं। साथ ही घर की लाइफ भी बढ़ती है।
इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज वाटरप्रूफिंग की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- कैसे समझें कि घर में वाटरप्रूफिंग की जरूरत है?
- इस दौरान किन बातों का ध्यान रखें?
एक्सपर्ट: दिनेश कुमार, सिविल इंजीनियर, लखनऊ
सवाल- मानसून से पहले घर की वाटरप्रूफिंग कराना क्यों जरूरी है?
जवाब- बारिश के कारण छोटे क्रैक्स और नमी बड़े लीकेज में बदल सकते हैं। समय पर की गई वाटरप्रूफिंग घर को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है और मरम्मत का खर्च कम करती है।
सवाल- वाटरप्रूफिंग न कराने पर क्या नुकसान हो सकते हैं?
जवाब- इससे घर को नुकसान होता है और उसकी लाइफ कम होती है। ग्राफिक में वाटरप्रूफिंग न कराने के संभावित नुकसान देखिए-

सवाल- किन संकेतों से पता चलता है कि घर में वाटरप्रूफिंग की जरूरत है?
जवाब- कुछ संकेत बताते हैं कि घर में वाटरप्रूफिंग की जरूरत है। इन्हें ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या नए घरों में भी वाटरप्रूफिंग जरूरी है?
जवाब- हां, इसे ‘प्रिवेंटिव वाटरप्रूफिंग’ कहते हैं। इससे भविष्य की समस्याओं से बचाव होता है।
- नया घर बनने के बाद कंक्रीट और प्लास्टर में हल्की दरारें आ सकती हैं, जिनसे पानी अंदर जा सकता है।
- समय पर वाटरप्रूफिंग कराने से छत टपकने, सीलन और पेंट खराब होने का रिस्क कम होता है।
- इससे सरिया और कंक्रीट सुरक्षित रहते हैं और घर मजबूत बना रहता है।
- निर्माण के समय वाटरप्रूफिंग कराना बाद में रिपेयर कराने की तुलना में सस्ता और आसान पड़ता है।

सवाल- वाटरप्रूफिंग कराने का सही समय क्या है?
जवाब- इसका सबसे सही समय मानसून से पहले है।
- सूखी सतह पर सामग्री बेहतर काम करती है। कोटिंग और केमिकल्स को सूखने का पूरा समय मिलता है।
- गर्म और सूखे मौसम में क्रैक्स व लीकेज आसानी से दिख जाते हैं और उन्हें ठीक किया जा सकता है।
- पहले से कराया गया काम बारिश के दौरान मरम्मत कराने से ज्यादा किफायती होता है।
सवाल- मानसून शुरू होने से कितने दिन पहले वाटरप्रूफिंग करा लेनी चाहिए?
जवाब- मानसून शुरू होने से कम-से-कम 25-30 दिन पहले वाटरप्रूफिंग करा लेनी चाहिए। इससे मरम्मत, कोटिंग और सूखने (क्योरिंग) के लिए पर्याप्त समय मिलता है।
सवाल- वाटरप्रूफिंग का काम कौन करता है? अपने शहर में सही कॉन्ट्रैक्टर कैसे ढूंढें?
जवाब- वाटरप्रूफिंग का काम आमतौर पर स्पेशलाइज्ड वाटरप्रूफिंग कॉन्ट्रैक्टर, सिविल रिपेयर कंपनियां या बिल्डिंग मेंटेनेंस सर्विस प्रोवाइडर करते हैं। ये लोग छत, बाथरूम, दीवार, बेसमेंट और पानी की टंकी जैसी जगहों पर लीकेज रोकने के लिए अलग-अलग टेक्नीक और केमिकल इस्तेमाल करते हैं।
वाटरप्रूफिंग कॉन्ट्रैक्टर ढूंढ रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें-
- पहले उनकी पुरानी साइट्स या काम की फोटो देखें।
- कॉन्ट्रैक्टर से लिखित वारंटी जरूर लें।
- कौन-सा मटेरियल इस्तेमाल होगा, यह स्पष्ट पूछें।
- सिर्फ सस्ता कोटेशन देखकर फैसला न लें।
- गूगल रिव्यूज और लोकल रेफरेंस जरूर चेक करें।
- ऐसे कॉन्ट्रैक्टर चुनें, जो पहले साइट इंस्पेक्शन करे, फिर समाधान बताएं।
- काम शुरू होने से पहले एरिया, लेयर और टाइमलाइन लिखित में तय करें।
सवाल- वाटरप्रूफिंग कितने प्रकार की होती है? कौन-सी टेक्नीक सबसे टिकाऊ मानी जाती है?
जवाब- घर में जरूरत के हिसाब से कई तरह की वाटरप्रूफिंग टेक्नीक इस्तेमाल की जाती हैं। हर टेक्नीक का उपयोग अलग जगह और समस्या के अनुसार होता है। ग्राफिक में देखिए, आपके घर के लिए कौन सी वाटरप्रूफिंग टेक्नीक सही है-

सवाल- छत की वाटरप्रूफिंग में कितना खर्च आता है? खर्च कैसे कैलकुलेट करें?
जवाब- खर्च आमतौर पर प्रति वर्गफुट तय होता है।
- टेक्नीक, मटेरियल और लीकेज की स्थिति पर लागत निर्भर करती है।
- साधारण कोटिंग सस्ती होती है, जबकि PU (पॉलीयुरेथेन) और मेम्ब्रेन सिस्टम महंगे होते हैं।
- क्रैक्स रिपेयर और लेबर चार्ज अलग जुड़ सकते हैं।
- इसलिए पहले साइट की माप और कॉन्ट्रैक्टर के साथ निरीक्षण जरूरी है।
सवाल- क्या छत और दीवारों के लिए अलग-अलग वाटरप्रूफिंग टेक्नीक होती है?
जवाब- हां, दोनों के लिए अलग टेक्नीक इस्तेमाल होती है।
- छत पर पानी ज्यादा रुकता है, इसलिए मजबूत मेम्ब्रेन या PU कोटिंग लगती है।
- बाहरी दीवारों में एंटी-सीपेज और UV-रेजिस्टेंट कोटिंग कारगर रहती है।
- बाथरूम और बेसमेंट के लिए अलग सिस्टम चुने जाते हैं।
सवाल- एक बार वाटरप्रूफिंग कराने के बाद यह कितने साल तक चलती है?
जवाब- वाटरप्रूफिंग की लाइफ टेक्नीक और केयर पर निर्भर करती है।
- सामान्य सीमेंट बेस्ड सिस्टम 5-7 साल चल सकते हैं।
- PU और मेम्ब्रेन सिस्टम 10-15 साल तक चल सकते हैं।
- खराब ड्रेनेज, दरारें और तेज धूप इसकी लाइफ घटा सकते हैं।
- इसलिए समय-समय पर निरीक्षण जरूरी है।
सवाल- वाटरप्रूफिंग कराते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब- वाटरप्रूफिंग कराते समय ग्राफिक में दी गई कुछ बातों का ख्याल जरूर रखें-

वाटरप्रूफिंग से जुड़े जरूरी सवाल-जवाब
सवाल- क्या पुरानी छत पर दोबारा वाटरप्रूफिंग कराई जा सकती है?
जवाब- हां, पुरानी छत पर दोबारा वाटरप्रूफिंग कराई जा सकती है।
- पहले पुरानी लेयर, क्रैक्स और लीकेज की जांच जरूरी होती है।
- जरूरत पड़ने पर सतह रिपेयर की जाती है।
- उसके बाद नई कोटिंग या मेम्ब्रेन लगाई जाती है।
- सही रिपेयर से छत की लाइफ बढ़ सकती है।
सवाल- क्या वाटरप्रूफिंग कराने के बाद भी रेगुलर मेंटेनेंस जरूरी होता है?
जवाब- हां, रेगुलर मेंटेनेंस जरूरी है। इसके लिए-
- छत पर पानी जमा न होने दें।
- क्रैक्स और ड्रेनेज समय-समय पर चेक करें।
- गटर और पाइप साफ रखें।
- छोटी खराबी तुरंत ठीक कराएं।
- रेगुलर निरीक्षण से वाटरप्रूफिंग ज्यादा समय तक टिकती है।
सवाल- क्या वाटरप्रूफिंग पर कंपनी वारंटी या गारंटी देती है?
जवाब- हां, कई कंपनियां और कॉन्ट्रैक्टर वारंटी देते हैं।
- वारंटी टेन्योर टेक्नीक और मटेरियल पर निर्भर करती है।
- सामान्य तौर पर 5-10 साल तक की वारंटी मिल सकती है।
- शर्तें पहले लिखित में जरूर लें।
- वारंटी में रिपेयर, लीकेज और सर्विस कवरेज समझना जरूरी है।
सवाल- वाटरप्रूफिंग और डैम्प-प्रूफिंग में क्या अंतर है?
जवाब- वाटरप्रूफिंग पानी के लीकेज को पूरी तरह रोकती है।
- डैम्प-प्रूफिंग सिर्फ नमी और सीलन कम करने के लिए होती है।
- वाटरप्रूफिंग छत, बेसमेंट और टैंक में ज्यादा उपयोग होती है।
- डैम्प-प्रूफिंग दीवारों और फर्श में नमी रोकने के लिए इस्तेमाल होती है।
- वाटरप्रूफिंग ज्यादा मजबूत और टिकाऊ समाधान माना जाता है।
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