रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) को लेकर दोटूक शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर भारत की नीति में कोई बदलाव नहीं आया है और देश अपने संप्रभु अधिकारों पर पूरी तरह अडिग है।
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हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र करते हुए विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया। जायसवाल ने कहा कि इस बर्बर हमले में कई निर्दोष लोगों की जान गई और मामले की जांच जारी है। उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान का दशकों पुराना रिकॉर्ड पूरी दुनिया के सामने है। पाकिस्तान लगातार आतंकवाद को अपनी सरकारी नीति के औजार के रूप में इस्तेमाल करता रहा है और उसकी भूमिका किसी से छिपी नहीं है।
पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते हालात पर भी विदेश मंत्रालय ने चिंता जताई। जायसवाल ने कहा कि भारत का हमेशा से स्पष्ट रुख रहा है कि किसी भी संघर्ष में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय समुद्री समुदाय के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। बड़ी संख्या में भारतीय नाविक इस क्षेत्र में कार्यरत हैं और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने एक अन्य प्रश्न के उत्तर में जानकारी दी कि भारत और फारस की खाड़ी के बीच समुद्री व्यापार सामान्य रूप से जारी है तथा इस समय सात भारतीय ध्वज वाले जहाज इस क्षेत्र में परिचालन कर रहे हैं। तेल आयात के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप दुनिया के विभिन्न देशों से कच्चे तेल की खरीद करता है।
ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर भी विदेश मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की। जायसवाल ने बताया कि अमेरिका द्वारा दी गई छूट (वेवर) पहले ही समाप्त हो चुकी है और इसके बाद भारत संबंधित पक्षों के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा कर रहा है। हाल में बंदरगाह पर हमले की खबरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं, लेकिन जिस टर्मिनल का संचालन भारत करता है, उसे किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचा।
इसके अलावा, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत और जापान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। जापान की ई-20 ट्रेन श्रृंखला शुरुआती 2030 के दशक में उपलब्ध होगी क्योंकि उसका विकास अभी जारी है। ऐसे में दोनों देशों ने परियोजना में देरी से बचने के लिए शुरुआती चरण में भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से परिचालन शुरू करने पर सहमति बनाई है। परियोजना का निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है और पहला खंड वर्ष 2027 में शुरू करने का लक्ष्य बरकरार है। विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संदर्भ में जापान की ओर से कोई अलग प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है तथा सिग्नलिंग प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्थापित की जा रही है।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण अनुरोध पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत को औपचारिक अनुरोध प्राप्त हुआ है। फिलहाल इस पर कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुरूप विचार किया जा रहा है और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस का समग्र संदेश यही रहा कि भारत सुरक्षा, संप्रभुता और रणनीतिक हितों पर अपने रुख को लेकर पूरी तरह स्पष्ट है। चाहे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद का मुद्दा हो, PoJK पर भारत का दावा, पश्चिम एशिया में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह का रणनीतिक महत्व या फिर मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना—सरकार ने हर मोर्चे पर यह संकेत दिया कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं और हर कदम उसी दृष्टि से उठाया जा रहा है।
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