UDID यानी यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान से जुड़ा एक अहम डॉक्यूमेंट होता है। उपलब्ध वर्गीकरण के अनुसार, दिव्यांगता के स्तर के आधार पर अलग-अलग रंग के कार्ड जारी किए जाते हैं।
क्या है येलो यूडीआईडी कार्ड
UDID यानी यूनिक डिसएबिलिटी आईडी कार्ड दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान से जुड़ा एक अहम डॉक्यूमेंट होता है। उपलब्ध वर्गीकरण के अनुसार, दिव्यांगता के स्तर के आधार पर अलग-अलग रंग के कार्ड जारी किए जाते हैं। इसमें सफेद, पीला और नीला कार्ड शामिल है। बता दें कि 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को सफेद कार्ड, 40 से 79 प्रतिशत तक दिव्यांगता वाले लोगों को पीला कार्ड और 80 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को नीला कार्ड जारी किया जाता है।
MBBS एडमिशन में 40 प्रतिशत से कम दिव्यांगता वाले उम्मीदवारों को दिव्यांगता कोटे के तहत आरक्षण का लाभ नहीं मिलता। ऐसे में काउंसलिंग और एडमिशन के दौरान दिव्यांग कोटे के तहत आरक्षण का लाभ लेने के लिए पीला UDID कार्ड सबसे अधिक प्रस्तुत किया जाने वाला दिव्यांगता प्रमाणपत्र है।
हर येलो UDID Card की होगी कड़ी जांच
MMCH के प्रिंसिपल डॉ. जक्का श्रीनिवास राव के अनुसार, MBBS एडमिशन के दौरान जमा किए जाने वाले प्रत्येक पीले UDID कार्ड को गहन सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। कॉलेज प्रशासन दिव्यांगता प्रमाणपत्रों की जांच में पूरी सतर्कता बरत रहा है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की गुंजाइश न रहे। उन्होंने बताया कि एडमिशन प्रक्रिया में निवास और जाति प्रमाणपत्रों के अलावा दिव्यांगता से जुड़े दस्तावेजों की भी विशेष जांच की जाती है।
श्रवण बाधिता के दावों पर खास नजर
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी एक रिपोर्ट में मेडिकल सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि श्रवण बाधितासे जुड़े दावों में अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ सकती है। इसके लिए उम्मीदवारों से मेडिकल टेस्ट भी कराया जा सकता है, ताकि दिव्यांगता के दावे की पुष्टि की जा सके।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2025 के MBBS एडमिशन के दौरान एक उम्मीदवार ने श्रवण बाधिता के आधार पर दिव्यांग श्रेणी में दाखिले का दावा किया था। हालांकि, जब उसे बताया गया कि प्रक्रिया के तहत ऑडियोमेट्री टेस्ट कराना होगा, तो उसने आगे दाखिले की प्रक्रिया में शामिल नहीं होने का फैसला किया।
इन दिव्यांगताओं को UDID के तहत किया जाता है कवर
UDID व्यवस्था के तहत कई प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया गया है। इनमें चलने-फिरने से संबंधित दिव्यांगता, दृष्टिबाधिता, श्रवण बाधिता, बोलने और भाषा से जुड़ी दिव्यांगता समेत अन्य श्रेणियां शामिल हैं।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि दिव्यांग कोटे के तहत MBBS में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि आरक्षण का लाभ केवल पात्र उम्मीदवारों को ही मिल सके और एडमिशन प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।
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