अमेरिका ने भारत के साथ एक ऐसी डिफेंस डील को हरी झंडी दे दी है। मंजूरी दे दी है जो सीधे तौर पर हिमालय की चोटियों पर भारत की मारक क्षमता को सुपर चार्ज कर देगी। 482.2 मिलियन डॉलर यानी करीब 4000 करोड़ का यह महा पैकेज। यह कोई साधारण खरीद फरोख्त नहीं है। बल्कि यह भारत के दो सबसे घातक हथियारों अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर और M7 अल्ट्रा लाइट होज़र की उम्र और ताकत बढ़ाने का एक ब्रह्मास्त्र है। दरअसल इस पूरी डील को समझने के लिए हमें अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन के उन दस्तावेजों को देखना होगा जो हाल ही में सार्वजनिक हुए डीएससीए यानी कि यूएस डिफेंस सिक्योरिटी कॉरपोरेशन एजेंसी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की। इस 482.2 मिलियन डॉलर के निवेश को दो मुख्य स्तंभों पर खड़ा किया गया। पहला स्तंभ है M7 होइजर का सस्टेनमेंट पैकेज $30 मिलियन का। यह हिस्सा भारतीय सेना के लिए है। इनमें तोपों के स्पेयर पार्ट्स, रखरखाव, ट्रेनिंग और सबसे महत्वपूर्ण डेपो कैपेबिलिटी शामिल है। यानी भारत के पास अब इन तोपों को स्वदेशी स्तर पर लंबे समय तक मेंटेन करने की क्षमता होगी।
इसे भी पढ़ें: PM Modi ने Kolkata में Indian Navy को सौंपे 3 स्वदेशी Warships
AH64E Apacचे का सपोर्ट पैकेज जो 198.2 मिलियन का है। यह हिस्सा भारतीय वायुसेना और थल सेना के बेड़े में शामिल अपाचे हेलीकॉप्टर्स के लिए है। इसमें लॉजिस्टिक, टेक्निकल डाटा, पब्लिकेशन और ट्रेनिंग शामिल है। यहां एक बात गौर करने वाली यह है कि अक्सर हम नए हथियार खरीद की बात करते हैं। लेकिन उनकी लाइफ साइकिल को बनाए रखना उससे भी बड़ी चुनौती होती है। अमेरिका से मिलने वाला यह सस्टेन मिंट सपोर्ट यह सुनिश्चित करता है कि अगर कल युद्ध छिड़ता है तो भारत के पास भारत के स्पेयर पार्ट्स की कमी नहीं होगी और यह वॉर वेस्टेड रिजर्व को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
इसे भी पढ़ें: फोटो खिंचवाने के लिए मेलोनी ने…मैंने मना कर दिया, ट्रंप ने अब क्या नया दावा कर दिया?
अब बात करते हैं उस हथियार की जिसने लद्दाख और अरुणाचल में चीन की सेना की नींद उड़ा रखी है। उसका नाम है M7 अल्ट्रा लाइट होइज़र। भारत ने करीब 145 ऐसी तोपें खरीदे थी। अब यह क्यों है इतनी खास? यह जान लीजिए। दरअसल M7 दुनिया की इकलौती ऐसी तोप है जो 155 एमएम की होने के बावजूद इतनी हल्की है कि इसे पहाड़ों की उन चोटियों पर भी तैनात किया जा सकता है जहां सड़कें तक नहीं बनती है। यह टाइटेनियम ऑयल से बनी हुई है। जब चीन ने एलएसी पर अपनी भारीभरकम तोपें तैनात की तो भारत ने चीनों हेलीकॉप्टर के जरिए इन एम ट्रिपल7 तोपों को रातों रात पहाड़ों की चोटियों पर पहुंचा दिया।
इस नए $30 मिलियन के पैकेज के तहत बीएई सिस्टम यूके भारत को तकनीकी सहायता देगी जिससे इन तोपों की ऑपरेशनल रेडीनेस हमेशा 100% रहे। इसमें रिपेयर एंड रिटर्न क्लॉज़ बहुत अहम है और अक्सर विदेशी हथियारों के खराब होने पर उन्हें विदेश भेजना पड़ता था। लेकिन अब इस डील के तहत भारत में ही ऐसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी कि यह तोपे हमेशा मैदान जंग के लिए तैयार रहें। वैसे आपको बता दें कि पहाड़ों पर अगर तोपे आग उगलती हैं तो आसमान से उनकी रक्षा करता है अपाचे। इस दुनिया का सबसे घातक टैंक किलर कहा जाता है अपाचे और अपाचे हेलीकॉप्टर का लॉन्गबो रडार एक साथ 128 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है और उनमें से 16 सबसे खतरनाक लक्ष्यों को एक बार में ही तबाह कर सकता है। भारत के पास फिलहाल वायुसेना के पास 22 अपाचे हैं और थल सेना के लिए भी छह नए अपाचे का आर्डर दिया गया है। अब अपाचे एक बहुत ही जटिल मशीन है। इसके सेंसर, इसकी मिसाइल प्रणाली और इसकी इंजन को निरंतर उच्च स्तर की देखरेख की जरूरत होती है।
इसे भी पढ़ें: योगा कर रहे थे देशवासी, अचानक भारत ने समुद्र में उतारे 3 युद्धपोत, मोदी ने जो कहा…
198.2 मिलियन डॉलर का यह पैकेज यह सुनिश्चित करेगा कि बोइंग और लॉकिड मार्टिन भारत को वो इंजीनियरिंग सपोर्ट दें जिससे भारत के पार्टों को ट्रेनिंग से लेकर युद्ध तक कोई कमी महसूस ना हो। इसमें टेक्निकल डाटा का मिलना बहुत बड़ी बात है क्योंकि यह भारत को इन हेलीकॉप्टर्स की प्रणालियों को गहराई में समझने में मदद करेगा। अब इस डील के पीछे सिर्फ तकनीक नहीं बल्कि गहरी राजनीति भी है। पेंटागन का कहना है कि यह डील भारत अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करेगा। अमेरिका जानता है कि अगर उसे चीन को रोकना है तो भारत को एक नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर की भूमिका में लाना होगा। यह डील दिखाती है कि अमेरिका भारत को सिर्फ एक खरीदार के रूप में नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देख रहा है। खैर 482 मिलियन की यह मेगा डील भारत के रक्षा इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय है। यह ना केवल हथियारों की ताकत को बढ़ाने के बारे में है बल्कि यह आत्मनिर्भरता और वैश्विक साझेदारी के बीच एक बेहतरीन तालमेल है। भारत अब मेक इन इंडिया के साथ-साथ सस्टेन इन इंडिया पर भी ध्यान दे रहा है और भविष्य में हम देखेंगे कि कैसे भारत इन तकनीकों को आत्मसात करता है। जैसे कि अमेरिका नोटिफिकेशन में कहा गया है कि भारत को इन सेवाओं को अपनी सेना में शामिल करने में कोई कठिनाई नहीं होगी और यह भारतीय सैनिकों की कौशल और भारत की सेना के आधुनिकीकरण की क्षमता पर दुनिया का भरोसा है।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.