नयी दिल्ली, तीन सितंबर मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) हिसाशी ताकेउची ने भविष्य में भी नियमों और वाहनों को किफायती बनाए रखने के बीच सही संतुलन बने रहने की बृहस्पतिवार को उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि इससे सुरक्षित और स्वच्छ परिवहन भारतीय ग्राहकों की पहुंच में बना रहेगा। ‘सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स’ (सियाम) के वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए ताकेउची ने कहा कि भारत में संपीड़ित बायोगैस की काफी संभावनाएं हैं, क्योंकि देश में पर्याप्त मात्रा में गोबर, बायोमास और कृषि अपशिष्ट उपलब्ध है, जिसे स्वच्छ वाहन ईंधन में बदला जा सकता है।
उन्होंने कहा, “लाखों भारतीय परिवारों के लिए कार खरीदना अब भी एक बड़ा सपना है। इससे उन्हें अधिक सुरक्षा, सुविधा और आराम मिलता है। इसलिए इनका किफायती होना महत्वपूर्ण है।”
ताकेउची ने कहा कि पिछले कई वर्षों में छोटी कारों का बाजार काफी घटा है, क्योंकि बढ़ती नियामकीय लागत के कारण पहली बार कार खरीदने वाले कई लोगों के लिए वाहन रखना मुश्किल हो गया है।
माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में हाल में किए गए सुधारों का असर खरीद क्षमता पर नजर आने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “ चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में 18 प्रतिशत जीएसटी दायरे वाली छोटी कारों में करीब 30 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 40 प्रतिशत जीएसटी दायरे वाली कारों में करीब 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई।”
उन्होंने कहा, “छोटी कारों में ही कम कीमत वाली कारों की बिक्री में करीब 100 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे पहली बार कार खरीदने वाले कई लोगों के लिए वाहन रखना अधिक सुलभ एवं किफायती हुआ है।”
जीएसटी सुधार के लिए सरकार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अन्य सरकारी अधिकारियों का आभार जताते हुए उन्होंने कहा, “भविष्य में भी मुझे उम्मीद है कि हम नियमों और ‘किफायत’ के बीच सही संतुलन कायम रख पाएंगे।”
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा कि सुरक्षित और स्वच्छ परिवहन लाखों भारतीय परिवारों की पहुंच में बना रहे। हरित परिवहन के बारे में उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन, हाइब्रिड, सीएनजी और सीबीजी (संपीड़ित बायोगैस) तथा एथनॉल जैसे जैव ईंधन सहित विभिन्न प्रौद्योगिकियों को अपनाने की कंपनी की रणनीति दोहराई। उन्होंने कहा कि भारत में सीबीजी की काफी संभावनाएं हैं, क्योंकि देश में पर्याप्त मात्रा में गोबर, बायोमास और कृषि अपशिष्ट उपलब्ध है, जिसे स्वच्छ वाहन ईंधन में बदला जा सकता है।
सीईओ ने कहा कि सीबीजी कार्बन उत्सर्जन को कम करने के साथ-साथ, “पराली जलाने पर रोक लगाता है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होता है। यह ग्रामीण भारत में आय तथा रोजगार के अवसर पैदा करता है।”
उन्होंने कहा कि सुजुकी भारत में बायोगैस उत्पादन पर पहले से काम कर रही है और गोबर आधारित तीन बायोगैस संयंत्र पहले ही चालू हो चुके हैं। उन्होंने कहा, “इसके अलावा, गोबर आधारित सात और कृषि आधारित चार बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जाने की प्रक्रिया में हैं।”
ताकेउची ने कहा कि हाल में हुए भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने भारत में 1,000 बायोगैस संयंत्र स्थापित कर बायोगैस उत्पादन बढ़ाने पर सहमति जताई।
इलेक्ट्रिक वाहन के बारे में उन्होंने कहा कि सुजुकी ने भारत को ई-विटारा के लिए वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाया है। ई-विटारा की 50 देशों को 46,000 इकाइयों का निर्यात हो चुका है जिसमें ब्रिटेन, यूरोप और जापान भी शामिल हैं। ताकेउची ने कहा, “इसके साथ हम भारत से बैटरी चालित इलेक्ट्रिक वाहन (बीईवी) के सबसे बड़े निर्यातक बन गए हैं और हमारी हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से अधिक है।
यह इस बात का महत्वपूर्ण उदाहरण है कि भारत उन्नत और सतत परिवहन प्रौद्योगिकियों का वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की क्षमता रखता है।”
उन्होंने कहा कि भारत ने स्वच्छ परिवहन की दिशा में मजबूत प्रगति की है। ताकेउची ने कहा, “अगर पिछले साल अप्रैल से जुलाई की अवधि को देखें तो ईवी, हाइब्रिड और सीएनजी जैसी स्वच्छ प्रौद्योगिकियों की उद्योग की कुल बिक्री में करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इस साल यह बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई है।
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