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मनोज बाजपेयी अपनी दमदार एक्टिंग और बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने करियर, फिल्मों और रैपिड फायर राउंड में दिलचस्प जवाब दिए। भारत की सबसे बड़ी ताकत, स्टारडम की परिभाषा, फाइनेंशियल आदतों और पसंदीदा खाने तक, मनोज ने कई सवालों के जवाब सहज अंदाज में दिए। पढ़िए, रैपिड फायर राउंड में मनोज बाजपेयी के जवाब।
सवाल: अगर एक शब्द में भारत को समझाना हो तो क्या कहेंगे?
जवाब: विविधता
सवाल: पावर या पीस?
जवाब: पीस हमेशा।
सवाल: ओटीटी या बिग स्क्रीन?
जवाब:बिग स्क्रीन
सवाल: कौन-सा किरदार आपको सबसे ज्यादा डराने वाला लगा?
जवाब: गली गुलियां

फिल्म ‘गली गुलियां’ के किरदार में गहराई से उतरने और उसका तनाव महसूस करने के कारण मनोज बाजपेयी असल जिंदगी में मानसिक संतुलन खोने की कगार पर पहुंच गए थे।
सवाल: आपकी एक फाइनेंशियल आदत क्या है?
जवाब: मैं और मेरा परिवार अपनी जरूरतें नहीं बढ़ाते। जितना जरूरी हो, उतना ही खर्च करते हैं।
सवाल: बिहार की कौन-सी बात दुनिया को सीखनी चाहिए?
जवाब: रिश्तों में अपनापन और अपनी जड़ों से जुड़े रहना।
सवाल: आपका कम्फर्ट फूड क्या है?
जवाब: दाल-चावल और परवल की भुजिया
सवाल: स्टारडम को एक शब्द में कैसे बताएंगे?
जवाब: अननेसेसरी
सवाल: कौन-सी चीज आपको सबसे ज्यादा परेशान करती है?
जवाब: जब लोग समय पर नहीं आते
सवाल: कौन-से कलाकार आपको अंडररेटेड लगते हैं?
जवाब: केके मेनन, विजय राज, रघुवीर यादव और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे कलाकार शानदार हैं। मुझे लगता है कि कई कलाकारों की प्रतिभा का सही इस्तेमाल नहीं हुआ।
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फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ के प्रमोशन के दौरान अभिनेता मनोज बाजपेयी ने राजनीति और नेतृत्व से जुड़े सवाल पर संतुलित जवाब दिया। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में जब उनसे पूछा गया कि अगर उन्हें प्रधानमंत्री को एक सलाह देनी हो तो वह क्या देंगे, तो उन्होंने कहा कि वह खुद को ऐसी स्थिति में नहीं मानते कि प्रधानमंत्री को कोई सलाह दे सकें।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..
आर्थिक संकट में देश संभालना बड़ी जिम्मेदारी:मनोज बाजपेयी बोले- आम आदमी खर्च नियंत्रित कर सकता है, लेकिन देश को संकट से एक्सपर्ट्स ही निकालते हैं

1991 के आर्थिक संकट पर बनी फिल्म ‘गवर्नर: द साइलेंट सेवियर’ को लेकर मनोज बाजपेयी ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक आरबीआई गवर्नर के देश की उम्मीद बनने और देश को संकट से निकालने की जंग दिखाई गई है। मनोज ने इसे ‘इकोनॉमिक थ्रिलर’ बताया। उन्होंने वैश्विक हालात, ईरान-यूएस तनाव, आम आदमी की परेशानियों, ओटीटी और थिएटर की कमी पर भी राय रखी।पूरा इंटरव्यू पढ़ें..
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