छुट्टियां मनाने के लिए पहाड़ों की ट्रिप कितनी शानदार लगती है लेकिन इन्हीं पहाड़ों पर अगर आपको रहना हो तो कैसा लगेगा? इसी एक्सपीरिएंस को कंटेंट क्रिएटर ने शेयर किया और बताया कि दो महीने से ज्यादा का वक्त कैसा गुजरा।
पहाड़ों से इमोशनल कनेक्शन
पहाड़ों पर रहना मेरे लाइफ के सबसे यादगार पल रहे और अब इस जगह को छोड़ना काफी मुश्किल भरा लग रहा क्योंकि अब ये जगह उन्हें घर जैसी लगने लगी है। यहां की सड़के, आसपास का एरिया, रूटीन, इन सबसे वो काफी अटैच हो गए थे। मनाली में रहने के अपने अनुभव को शेयर करते हुए अजय ने ये सब वीडियो में बताया। लेकिन अब उन्हें पहाड़ों की लाइफ को छोड़कर दिल्ली वापस लौटना पड़ रहा क्योंकि अब उन्हें लाइफ के नए फेज की शुरुआत करनी है।
कैसी रही पहाड़ों पर लाइफ
अजया बताते हैं कि वो एक टूरिस्ट की तरह नहीं बल्कि पहाड़ों पर रिमोट वर्क करके एक्सपीरिएंस लेना चाहते थे। और यहां रहने के बाद उन्हें पता चला यहां पर उनकी लाइफस्टाइल कितनी सस्ती है।
हर महीने कितना खर्च होता था
- कंटेट क्रिएटर ने बताया कि वो एक वन बेडरूम फ्लैट में अकेले रहते थे जिसके लिए करीब 14 हजार रुपये हर महीने का किराया देते थे। जिसमे बिजली और वाई फाई का बिल शामिल था।
- चूंकि वो घर का बना खाना ज्यादा खाते थे तो राशन का लगभग 3500 रुपये खर्च करते थे। वहीं जिस दिन वो कुक नहीं कर पाते थे तो बाहर से खाते थे और इसका खर्च हफ्ते का लगभग 500 रुपये था।
- अजय ने एक लोकल जिम ज्वॉइन किया था जिसकी प्राइम मेंबरशिप 1800 रुपये थी और उन्होंने इसे कम करवाकर 1500 रुपये करवाई थी।
- जबकि ट्रांसपोर्टेशन के लिए उनका कोई खर्च नहीं होता था क्योंकि वो ज्यादातर पैदल ही जाते-आते थे। इस तरह कुल मिलाकर मनाली में उन्होंने एक महीने का खर्च 21000 रुपये था।
- इसका मतलब है कि उनके 2 महीने से ज्यादा का खर्च किसी लंबी छुट्टी जितना नहीं था।
आसान नहीं है जिंदगी
पहाड़ों पर जितनी आसान जिंदगी दिखती है उतनी है नहीं। भले ही खर्च कम हो लेकिन काफी सारी समस्याएं भी होती है।
नेटवर्क की समस्या
चूंकि अजय रिमोट वर्क कर रहे थे इसलिए उन्हें हर वक्त इंटरनेट नेटवर्क की जरूरत होती थी और कनेक्टिविटी कई बार मुश्किल हो जाती थी। अचानक से नेटवर्क चले जाना रोज की समस्या थी। जिसकी वजह से वर्क रूटीन डिस्टर्ब होता था।
बिन मौसम बारिश
वहीं यहां पर बारिश भी दिनभर के प्लान को खराब कर सकता है। मॉनसून आने पर ये समस्या और बढ़ जाती है और रोड की कंडीशन भी खराब हो जाती है।
खराब सड़कें
मॉनसून के सीजन में रोड की खराब हालत समस्या को और भी ज्यादा बढ़ा देती है। जिससे रोजमर्रा के काम में दिक्कत होती है।
सुंदर जगहों की हकीकत
फोटो में जो जगहें काफी खूबसूरत दिखती हैं। नदी, पहाड़, झरने, अक्सर उन जगहों तक पहुंचना काफी मुश्किल भरा होता है। ज्यादातर जगहें बहुत ही ऊंचे कठिन ट्रैक पर जाने के बाद मिलती हैं।
सच्चाई बिल्कुल अलग होती है
कंटेंट क्रिएटर के शेयर वीडियो से पता चलता है कि छुट्टियां मनाने और उसी जगह पर हमेशा रहने में काफी अंतर होता है। लेकिन तमाम मुश्किलों के बाद भी अजय इस एक्सपेरिमेंट को अच्छा मानते हैं।
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