आयुर्वेद में त्रिफला को बहुत ही फायदेमंद चूर्ण बताया गया है। आचार्य बाल कृष्ण की मानें तो त्रिफला का इस्तेमाल लोग कब्ज से राहत पाने के लिए करते हैं। रात में सोने से पहले 1 चम्मच त्रिफला खाने से कब्ज, पाचन और पेट साफ न होने की समस्या दूर होती है। लेकिन त्रिफला इसके साथ कई दूसरी बीमारियों और उसके मूल कारणों को ठीक करने का भी काम करता है। त्रिफला खाने से वजन कम होता है, लिवर डिटॉक्स होता है, आंखों की रोशनी को ठीक करता है, ये पाचन को ठीक करता है और एंटी एजिंग का काम करते हुए त्वचा को भी फायदा पहुंचाता है। आप बाजार से त्रिफला खरीदकर खा सकते हैं। हालांकि इसे घर में बनाना भी बहुत आसान है। त्रिफला बनाने के लिए आपको आंवला, हरड़ और बहेड़ा चाहिए। आइये जानते हैं त्रिफला बनाने में इनकी कितनी मात्रा होनी चाहिए।
त्रिफला बनाने के लिए कितना आंवला, हरड़ और बहेड़ा चाहिए?
- त्रिफला यानि तीन फलों सो बनने वाला पाउडर। त्रिफला बनाते वक्त आपको 1:2:3 के अनुपात से चीजें लेनी हैं। इसमें जिसमें 1 भाग हरड़, 2 भाग बहेड़ा, 3 भाग आंवला लेना होता है।
- सबसे पहले आप भाग यानि 20 ग्राम हरड़ लें और हरड़ का छिलका हटा दें। हरको को धूप में सुखा लें, जिससे इसे पीसना आसान हो जाता है। सूखने पर मिक्सी में पीसकर पाउडर बना लें। आप चाहें तो सारी चीजों को एक साथ भी पीस सकते हैं।
- अब हरड़ के दो हिस्से के बराबर यानि 40 ग्राम बहेड़ा लें और उसे भी छिलका हटाकर सुखा लें। किसी में बीज हों तो उसे भी निकाल दें। सूखने पर हल्का कूटकर दरदरा कर लें। इसे हरड़ के साथ पीस सकते हैं या अलग से भी पीस सकते हैं। तीनों चीजों को मिलाकर भी पीस सकते हैं।
- अब सीजन पर 60 ग्राम आंवला लें यानि हरण का तीन गुना आंवला होना चाहिए। आंवला को अच्छी तरह धोकर सुखा लें। आंवला के सूखने पर उसके बीच निकाल दें और टुकड़ों में तोड़ दें। आंवला को सूखने पर कूट लें और फिर मिक्सी में पीसकर पाउडर बना सें। अगर सारी चीजों को एक साथ पीस रहे हैं तो भी अच्छा है। अलग अलग पीसा है तो सभी चीजों को मिलाकर चूर्ण को किसी डब्बे में भर लें।
तैयार है आपका घर का बना शुद्ध त्रिफला पाउडर, जिसे आप सालों तक इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे तो त्रिफला को ऐसे ही लिया जाता है लेकिन अगर स्वाद पसंद न आए तो इसमें 1 चम्मच काला नमक मिलाकर रख लें। इसे स्वाद में कड़वापन कम आएगा।
त्रिफला के फायदे
त्रिफला में इस्तेमाल होने वाला आंवला या आमलकी विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर की गर्मी को शांत होती है। वहीं हरड़ जिसे हरितकी भी कहते हैं इसका सेवन पाचन शक्ति में सुधार लाता है और कब्ज को दूर करता है। बहेड़ा को बिभीतक भी कहते हैं ये शरीर से टॉक्सिन को साफ कर बाहर निकालता है। इससे श्वसन तंत्र मजबूत होता है।
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