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भगवान महाकालेश्वर की पहली सवारी 3 अगस्त जबकि अंतिम सवारी 7 सितंबर को निकाली जाएगी।
भगवान शिव के प्रिय सावन माह की शुरुआत इस साल गुरुवार 30 जुलाई से हो रही है जबकि समापन पूर्णिमा तिथि के साथ 28 अगस्त को होगा। इस पवित्र महीने में आराधना के लिए प्रदेशभर के सभी मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में प्रतिदिन करीब 4 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। सावन के चार और भादौ महीने के दो सोमवार को भगवान महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
इस बार श्रावण पूर्णिमा 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से 28 अगस्त की सुबह 9:48 बजे तक रहेगी।

सावन के चार और भादौ महीने के दो सोमवार को बाबा महाकाल की राजसी सवारी निकलेगी।
महाकाल की पहली सवारी 3 अगस्त को
भगवान महाकालेश्वर की पहली सवारी 3 अगस्त जबकि अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर को निकाली जाएगी। सवारी शाम 4 बजे मंदिर प्रांगण से निकलेगी और करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी दूरी तय कर शाम 5 बजे रामघाट पहुंचेगी।
रामघाट पर शिप्रा से जलाभिषेक, पूजन, आरती के बाद बाबा वापस मंदिर के लिए प्रस्थान करेंगे। सवारी शाम 7 बजे मंदिर पहुंचेगी।

भक्तों के लिए चलित आरती दर्शन
महाकाल मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार, इस साल भी सभी आरतियों में कार्तिक मंडप की पहली तीन पंक्तियों से श्रद्धालुओं को चलित आरती दर्शन कराए जाएंगे। सभी सवारियों में जनजातीय सांस्कृतिक दल प्रस्तुति देंगे।
हर सवारी में पांच एलईडी रथ शामिल किए गए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 15 जगहों पर मेडिकल टीमें और 24×7 एंबुलेंस की व्यवस्था रहेगी।
महाकाल मंदिर आ रहे हैं तो यहां के इंतजाम जान लीजिए
पट खुलने के समय में बदलाव
सावन-भादौ मास में 30 जुलाई से 7 सितंबर तक भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर के पट प्रतिदिन सुबह 3:00 बजे जबकि हर सोमवार को सुबह 2:30 बजे खुलेंगे। भस्म आरती प्रतिदिन सुबह 3:00 बजे से 5:00 बजे जबकि सोमवार को सुबह 2:30 बजे से 4:30 बजे तक होगी। 8 सितंबर से मंदिर के पट पूर्व निर्धारित समय पर खुलने लगेंगे।

दर्शन के लिए अलग व्यवस्था
मंदिर में आम श्रद्धालुओं के लिए दो अलग-अलग द्वार से दर्शन की व्यवस्था है। श्रद्धालु भगवान महाकाल को श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप और कार्तिकेय मंडपम में स्थापित जलपात्र के माध्यम से जल अर्पित कर सकेंगे।
श्रावण-भादौ माह में त्रिवेणी संग्रहालय के पास नंदी द्वार, श्री महाकाल महालोक, मानसरोवर भवन, फेसिलिटी सेंटर-1, टनल मंदिर परिसर, कार्तिक मण्डपम, गणेश मण्डपम से भगवान श्री महाकालेश्वर के दर्शन किए जा सकेंगे।
नीलकंठ प्रवेश द्वार की ओर से आने वाले श्रद्धालु मानसरोवर भवन में प्रवेश कर फेसिलिटी सेंटर-1 और टनल मंदिर परिसर, कार्तिक मण्डपम, गणेश मण्डपम से दर्शन करने के बाद निर्माल्य द्वार या आपातकालीन द्वार से सीधे बाहर निकलेंगे।



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महाकाल मंदिर में पहली बार दक्षिण भारतीय प्रसाद

महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में अब दक्षिण भारतीय भोजन भी परोसा जा रहा है। मंगलवार से इसकी शुरुआत कर दी गई है। मंदिर प्रशासन ने कहा है कि अब हर मंगलवार और शुक्रवार को यहां आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में साउथ इंडियन डिशेज दी जाएंगी। सावन में यहां फलाहारी भोजन मिलेगा। पढ़ें पूरी खबर…
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