राहुल गांधी ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की है. मायावती वर्षों से यह मांग कर रही हैं. यह अखिलेश यादव को तो परेशान करने वाला है ही, बीजेपी और मायावती के लिए भी यह कम संकट की बात नहीं. एक बात तय है कि राहुल गांधी के इस एक लेटर से यूपी का सियासी तापमान जरूर बढ़ेगा.
राहुल गांधी ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की है.
आज जो कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने वजूद की लड़ाई लड़ रही है, एक समय में इसी यूपी में उसका एकछत्र राज हुआ करता था. उस दौर में कांग्रेस का सबसे मजबूत समीकरण ‘ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम’ (BDM) हुआ करता था. दलित समाज कांग्रेस का सबसे वफादार और कोर वोटर था. बाबू जगजीवन राम जैसे नेताओं के चेहरे पर दलित आंख मूंदकर हाथ के निशान पर मुहर लगाते थे. लेकिन 80 के दशक के आते-आते यह समीकरण दरकने लगा.
कांशीराम का उदय और कांग्रेस का ‘गर्त’ में जाना
यही वह दौर था जब यूपी की धरती पर कांशीराम का उदय हुआ. बामसेफ (BAMCEF) और ‘डीएस-4’ (DS-4) से होते हुए जब कांशीराम ने 1984 में बहुजन समाज पार्टी यानी BSP की स्थापना की, तो उन्होंने सीधा हमला कांग्रेस के उसी दलित वोट बैंक पर किया. कांशीराम का नारा था- वोट हमारा, राज तुम्हारा, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा.
कांशीराम ने दलितों, शोषितों और पिछड़ों को यह समझाया कि जो कांग्रेस उनसे वोट लेकर सत्ता चलाती है, वह असल में उन्हें सिर्फ एक वोट बैंक मानती है, हिस्सेदार नहीं. धीरे-धीरे दलित कांग्रेस से छिटकने लगा और हाथी की सवारी करने लगा. मायावती के सियासी उभार ने इस प्रक्रिया को पूरा कर दिया. दलित पूरी तरह बसपा के पाले में चला गया और कांग्रेस यूपी में ऐसी गर्त में गई कि आज तक वापसी के लिए छटपटा रही है. मायावती के उदय ने कांग्रेस को यूपी में हाशिए पर धकेल दिया था.
भारत सरकार से सामाजिक न्याय के महान योद्धा और बहुजन चेतना के मार्गदर्शक मान्यवर कांशीराम जी को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग करता हूं।
यह सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान कांशीराम जी के साथ उस पूरे आंदोलन को श्रद्धांजलि होगी जिसने करोड़ों बहुजनों को हक़, हिस्सेदारी और आत्मसम्मान… pic.twitter.com/XF9MGjcj4J
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