मौजूद जानकारी के अनुसार महिलाओं के 75 किलोग्राम वर्ग में केवल पांच मुक्केबाजों की चुनौती थी। इसी कारण लवलीना बोरगोहाईं को पहले दौर में मुकाबला नहीं खेलना पड़ा और उन्हें सीधे अंतिम चार में जगह मिल गई। इसके साथ ही उनका राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पदक जीतना तय हो गया है।
अब लवलीना बोरगोहाईं का अगला मुकाबला 31 जुलाई को तुवालु की मुक्केबाज टीकेबीपी ताफाकी के खिलाफ होगा। इस मुकाबले में जीत हासिल करने वाली खिलाड़ी सीधे स्वर्ण पदक मुकाबले में पहुंचेगी। ऐसे में भारतीय मुक्केबाज के पास कांस्य से आगे बढ़कर रजत या स्वर्ण पदक जीतने का शानदार अवसर रहेगा।
गौरतलब है कि 28 वर्षीय लवलीना बोरगोहाईं भारतीय मुक्केबाजी की सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल हैं। उन्होंने इससे पहले टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। इसके अलावा विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप, एशियाई खेल और एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भी उन्होंने कई पदक अपने नाम किए हैं। हालांकि राष्ट्रमंडल खेलों का पदक अब तक उनकी उपलब्धियों की सूची में शामिल नहीं था।
इस बार ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में उन्होंने वह कमी भी पूरी कर ली हैं। अब उनके पास अपने पहले राष्ट्रमंडल खेल पदक का रंग बदलने का मौका है। भारतीय खेल प्रेमियों और खेल विशेषज्ञों को उम्मीद है कि लवलीना अपने अनुभव और शानदार तकनीक के दम पर सेमीफाइनल में जीत दर्ज कर फाइनल तक पहुंचेंगी।
बता दें कि भारतीय दल के लिए राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत सकारात्मक रही है। लवलीना के पदक पक्का करने से अन्य खिलाड़ियों का भी मनोबल बढ़ेगा। आने वाले दिनों में पैरा भारोत्तोलन, तैराकी, जिम्नास्टिक और अन्य खेलों में भी भारत को पदक की उम्मीदें हैं। ऐसे में भारतीय दल इस प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन कर पदक तालिका में मजबूत स्थिति बनाने की कोशिश करेगा, जबकि लवलीना बोरगोहाईं की नजर अब सीधे स्वर्ण पदक जीतकर देश को बड़ी सफलता दिलाने पर टिकी हुई हैं।
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