कंपनी की इस शानदार ग्रोथ में CDMO (Contract Development and Manufacturing Organisation) बिजनेस की सबसे बड़ी भूमिका रही। इस सेगमेंट से होने वाला रेवेन्यू 67% बढ़कर ₹870 करोड़ पहुंच गया। कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 तक कुल कारोबार का 50% से ज्यादा हिस्सा CDMO बिजनेस से आए। वहीं, अफोर्डेबल मेडिसिन्स बिजनेस ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और इसकी आय 10% बढ़कर ₹1,156 करोड़ हो गई।
लॉरस लैब्स ने अपने भविष्य की योजनाओं को लेकर भी बड़ा अपडेट दिया है। कंपनी ने बताया कि KRKA के साथ संयुक्त उद्यम (Joint Venture) के तहत नई FDF (Finished Dosage Formulation) मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का निर्माण तय समय पर चल रहा है और इसका पहला चरण 2027 के मध्य तक शुरू होने की उम्मीद है। इसके अलावा कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपना कैपेक्स (पूंजीगत खर्च) ₹1,000 करोड़ से बढ़ाकर ₹2,000 करोड़ कर दिया है। कंपनी का कहना है कि मौजूदा ग्राहकों से मजबूत डिमांड और GLP-1 व पेप्टाइड्स जैसे नए बिजनेस सेक्टर्स में बड़े अवसरों को देखते हुए यह निवेश बढ़ाया गया है।
आने वाले 3 से 4 सालों में लॉरस लैब्स खुद को पूरी तरह एकीकृत (Integrated) फार्मा कंपनी के रूप में विकसित करना चाहती है, जो API, दवाओं के निर्माण, जेनेरिक कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग और नई दवाओं के विकास जैसे सभी सेक्टर में मजबूत मौजूदगी रखेगी। कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों और भविष्य की योजनाओं ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जिसकी झलक शेयर की तेज उछाल में साफ दिखाई दी।
Discover more from Hindi News Blogs
Subscribe to get the latest posts sent to your email.