Petpuja software : आयकर विभाग को शक है कि बिलिंग सॉफ्टवेयर पेटपूजा का इस्तेमाल कर देशभर में बहुत से रेस्टोरेंट्स ने करीब 70 हजार करोड़ की टैक्स चोरी की है. पेटपूजा एक रेस्टोरेंट मैनेजमेंट और बिलिंग सॉफ्टवेयर है, जिसका इस्तेमाल बहुत से रेस्टोरेंट्स भारत और कई दूसरे देशों में करते हैं.
पेटपूजा (Petpooja) सॉफ्टवेयर की रेस्टोरेंट उद्योग में इन दिनों अच्छी-खासी मांग है.
पेटपूजा (Petpooja) सॉफ्टवेयर की रेस्टोरेंट उद्योग में इन दिनों अच्छी-खासी मांग है. यह ‘डिजिटल दिमाग’ भारत समेत दुनिया के कई देशों में रेस्टोरेंट ऑपरेशंस के लिए अहम बन चुका है. महज एक सॉफ्टवेयर से शुरू हुआ यह सफर आज 1,50,000 से अधिक आउटलेट्स को पावर दे रहा है. आखिर क्या है पेटपूजा, किसने इसे बनाया और क्यों यह छोटे ढाबों से लेकर बड़े कैफे तक की पहली पसंद बन गया है? आज हम आपको बताएंगे.
क्या है पेटपूजा सॉफ्टवेयर?
पेटपूजा एक क्लाउड-आधारित रेस्टोरेंट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर है, जिसे तकनीकी भाषा में पीओएस (Point of Sale) कहा जाता है. सरल शब्दों में कहें तो यह एक ऐसा डिजिटल टूल है जो रेस्टोरेंट मालिक को बिलिंग से लेकर इन्वेंटरी (स्टॉक) मैनेजमेंट तक की सारी सुविधाएं एक ही जगह उपलब्ध कराता है. यह सॉफ्टवेयर विशेष रूप से छोटे और मध्यम आकार के रेस्टोरेंट्स (SMBs), कैफे, क्लाउड किचन और बेकरी के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह ऑफलाइन भी काम करता है, यानी इंटरनेट न होने पर भी बिलिंग नहीं रुकती.
किसने और कब की पेटपूजा की शुरुआत?
पेटपूजा की नींव साल 2011 में गुजरात के अहमदाबाद में रखी गई थी. इसे दो कॉलेज मित्रों पार्थिव पटेल और अपूर्व पटेल ने मिलकर बनाया. पार्थिव अब इसके सीईओ हैं जबकि अपूर्व पटेल सीएसओ हैं. दोनों ने महसूस किया कि भारतीय रेस्टोरेंट मालिक बिलिंग, चोरी और कच्चे माल की बर्बादी (Operational Loss) जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. इसी समस्या का समाधान उन्होंने पेटपूजा के रूप में दिया.
कंपनी में काम करते हैं 1300 कर्मचारी
कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, आज पेटपूजा में 1,300 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं. हाल ही में इसने सीरीज सी फंडिंग के तहत ₹137 करोड़ जुटाए हैं. कंपनी का दावा है उसके एक लाख कस्टमर्स हैं. भारत, यूएई और साउथ अफ्रीका में सेवाएं दे रही है. 60 लाख से ज्यादा बिल रोज पेटपूजा सॉफ्टवेयर से प्रोसेस होते हैं.
क्यों लोकप्रिय है पेटपूजा?
- ऑनलाइन ऑर्डर इंटीग्रेशन: यह Zomato और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ सीधे जुड़ा हुआ है. ऑनलाइन ऑर्डर आते ही सीधे सॉफ्टवेयर में दिख जाते हैं, अलग-अलग टैबलेट रखने की जरूरत नहीं पड़ती.
- इन्वेंटरी मैनेजमेंट: किचन में कितना आटा, तेल या सब्जियां बची हैं, इसकी सटीक जानकारी देता है.
- 80+ रिपोर्ट्स: मालिक दुनिया के किसी भी कोने से मोबाइल ऐप के जरिए देख सकता है कि आज कितनी सेल हुई और कितना मुनाफा हुआ.
- QR मेन्यू और पेमेंट: ग्राहक टेबल पर बैठे-बैठे QR कोड स्कैन कर ऑर्डर दे सकते हैं और UPI के जरिए भुगतान कर सकते हैं.
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